नई दिल्ली। देश की सीमाओं की मुस्तैदी से रक्षा करने वाली सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जांबाज महिला प्रहरी अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर नया इतिहास रचने के बेहद करीब हैं। अपनी स्थापना की हीरक जयंती (60वें वर्ष) मना रहा सीमा सुरक्षा बल इस खास मौके को और अधिक गौरवमयी बनाने के लिए एक अनूठी पहल कर रहा है। वर्ष 1965 में स्थापित इस बल का वीरता, सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का एक शानदार इतिहास रहा है। इसी गौरवशाली सफर के उपलक्ष्य में और भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर, बीएसएफ की जांबाज महिला पर्वतारोही टीम ‘मिशन वंदे मातरम’ के तहत माउंट एवरेस्ट पर ऐतिहासिक चढ़ाई का प्रयास करने जा रही है। यह साहसिक अभियान सीमा सुरक्षा बल की एक ऐसी अभूतपूर्व पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाना, नारी शक्ति का वंदन करना और युवाओं में साहसिक भावना का संचार करना है।
यह मिशन न सिर्फ बीएसएफ बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह पहली बार है जब सीमा सुरक्षा बल की किसी विशेष महिला पर्वतारोही टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरी मुहिम में राष्ट्रवाद का जबरदस्त जोश भरने के लिए इन जांबाज बेटियों ने एक अनोखा संकल्प लिया है। ये पर्वतारोही जब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फहराएंगी, तब वहां से पूरे विश्व के सामने ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष भी करेंगी। इस प्रतिष्ठित एवरेस्ट टीम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आईं चार महिला प्रहरी शामिल हैं, जिनमें लद्दाख से एम/सीटी कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल से एम/सीटी मुनमुन घोष, उत्तराखंड से एम/सीटी रबेका सिंह और लद्दाख/कारगिल क्षेत्र से एम/सीटी त्सेरिंग चोरोल शामिल हैं।
भारत के विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली तथा बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली ये चारों बेटियां आज अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प, कठोर अनुशासन और राष्ट्र सेवा के प्रति सर्वोच्च समर्पण की भावना का जीवंत प्रतीक बन चुकी हैं। इस बेहद चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित अभियान में उनकी यह भागीदारी यह साबित करती है कि सीमा सुरक्षा बल की महिला कार्मिक अब केवल सीमाओं की रखवाली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बल की सबसे कठिन परिचालन और साहसिक गतिविधियों में भी अपनी बढ़ती भूमिका और अद्वितीय क्षमताओं का लोहा मनवा रही हैं।
माउंट एवरेस्ट को फतह करने के अपने इस सफर में बीएसएफ की इस जांबाज महिला टीम ने बेहद कड़े और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए ऊंचाई के साथ खुद को ढालने (एक्लिमेटाइजेशन) का चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। बर्फीले तूफानों और शून्य से कई डिग्री नीचे के तापमान का सामना करते हुए यह टीम वर्तमान में एवरेस्ट के सबसे कठिन पड़ावों में से एक ‘साउथ कोल’ पर मुस्तैदी से डटी हुई है। यदि मौसम की स्थिति अनुकूल रहती है और बर्फीली हवाएं रफ्तार नहीं पकड़ती हैं, तो शिखर पर पहुंचने की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चढ़ाई 21 मई की अलसुबह शुरू कर दी जाएगी। ‘मिशन वंदे मातरम’ के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल पूरे विश्व को राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण और देशभक्ति की अटूट प्रतिबद्धता का संदेश देना चाहता है, ताकि देश की युवा पीढ़ी को हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित किया जा सके।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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