लखनऊ। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले शातिर भगोड़े आरोपी समीर जोशी को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को राजधानी के **हजरतगंज मेट्रो स्टेशन** से पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2012 का है, जब एलआईसी के अधिकारियों ने सीबीआई से शिकायत की थी कि जानकीपुरम शाखा में करोड़ों रुपये का गबन हुआ है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी पॉलिसी धारकों के नाम पर फर्जी चेक तैयार किए और एलआईसी की निधि का दुरुपयोग किया।
धोखाधड़ी की अवधि: फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच।
कुल गबन: जानकीपुरम शाखा में कुल ₹6,37,66,660 (6.37 करोड़ से अधिक) की हेराफेरी हुई थी।
समीर जोशी पर ₹62 लाख के गबन का आरोप
सीबीआई ने 21 अगस्त 2014 को समीर जोशी समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। समीर जोशी पर 62 लाख रुपये के गबन का विशिष्ट आरोप है। जांच के अनुसार, समीर ने एलआईसी के तत्कालीन अधिकारी पंकज सक्सेना के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया था। इस फर्जीवाड़े में समीर की पत्नी अंजू जोशी और कर्मचारी जितेंद्र कुमार भी शामिल थे। इन लोगों ने फर्जी चेक बनाकर बैंक से पैसे भुनाए और आपस में बांट लिए थे।
जमानत के बाद हो गया था फरार
जांच के दौरान समीर जोशी को पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद जब कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई, तो वह मुकदमे से बचने के लिए फरार हो गया।
अदालत ने घोषित किया था भगोड़ा
लगातार पेश न होने के कारण सीबीआई की अर्जी पर अदालत ने पिछले साल 24 दिसंबर 2025 को समीर जोशी को ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया था। तब से सीबीआई उसकी तलाश में जुटी थी। आखिरकार मंगलवार को लखनऊ मेट्रो स्टेशन पर उसकी मौजूदगी की सटीक सूचना मिलने पर सीबीआई ने उसे धर दबोचा।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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