आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• विज्ञान, गणित से लेकर कृषि और पर्यावरण तक की गतिविधियों से निखर रही विद्यार्थियों की प्रतिभा
• व्यावहारिक ज्ञान के साथ विकसित हो रही तार्किक क्षमता
सोनभद्र । परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा से जोड़ने की पहल रंग लाने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा को आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में सोनभद्र के 26 परिषदीय विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब स्थापित की गई हैं। इन लैबों में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थी विभिन्न गतिविधियों के जरिए विज्ञान, गणित और तकनीक के सिद्धांतों को समझ रहे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और समस्याओं का समाधान खोजने की योग्यता विकसित करना है।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित इस पहल से विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान स्वयं प्रयोग करने और अपने अनुभवों से सीखने का अवसर मिल रहा है। कृषि, बागवानी, पर्यावरण, स्वास्थ्य और पोषण जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को किताबी ज्ञान का वास्तविक जीवन में उपयोग समझाया जा रहा है।
प्रयोगों से आसान हो रही विज्ञान और गणित की पढ़ाई –
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लर्निंग बाय डूइंग लैब इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यहां बच्चे विभिन्न प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विषयों को समझने के साथ अपनी जिज्ञासा और रचनात्मकता को भी विकसित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लैब में इंजीनियरिंग एवं वर्कशॉप, ऊर्जा एवं पर्यावरण, कृषि एवं बागवानी तथा स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित गतिविधियां कराई जाती हैं। विद्यार्थी औजारों की पहचान, मापन और मॉडल निर्माण के साथ बीज अंकुरण, जैविक खाद तैयार करने, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे विषयों को व्यावहारिक रूप से सीखते हैं। इन गतिविधियों के जरिए उनमें टीमवर्क, अनुशासन, आत्मविश्वास और श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।”
कपड़ों की रंगाई से समझा अनुपात, पाक-कला से सीखे गणित के गुर –
लर्निंग बाय डूइंग लैब में बच्चों को रोजमर्रा की गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई के सिद्धांत समझाए जा रहे हैं। इसका उदाहरण दुद्धी विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय दीघुल में देखने को मिला, जहां विद्यार्थियों ने टाई एंड डाई तकनीक से कपड़ों की रंगाई की। इस गतिविधि के दौरान बच्चों ने रंगों के व्यवहार, अनुपात और सममिति के बारे में जानकारी हासिल की।
इसी तरह कंपोजिट विद्यालय अमोली प्रथम में पाक-कला गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने सामग्री का वजन करने, अनुपात निर्धारित करने, स्वच्छता बनाए रखने और गर्मी के प्रभाव से खाद्य पदार्थों में होने वाले बदलावों को समझा। इन गतिविधियों से बच्चे पुस्तकों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक जीवन से जोड़कर सीख रहे हैं। इससे पढ़ाई को अधिक रोचक और सहज बनाने में मदद मिल रही है।
शिक्षकों को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण –
जिलाधिकारी चर्चित गोंड ने बताया कि “गतिविधि आधारित शिक्षा को प्रभावी बनाने में शिक्षकों की भूमिका अहम है। इस पद्धति में शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने, सवाल पूछने और अपने निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके लिए शिक्षकों को भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे लैब में होने वाली गतिविधियों को कक्षा शिक्षण से बेहतर तरीके से जोड़ सकें।”
व्यावहारिक शिक्षा से मजबूत होगी भविष्य की नींव –
जनपद के 26 परिषदीय विद्यालयों में स्थापित लर्निंग बाय डूइंग लैब के माध्यम से बच्चों को विज्ञान, गणित, कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे विषयों को समझने का व्यावहारिक अवसर मिल रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या समाधान, आपसी सहयोग और तकनीकी समझ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, यह पद्धति भविष्य में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए भी मजबूत आधार तैयार करने में सहायक हो सकती है।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






