सोनभद्र। मध्य प्रदेश के सिंगरौली स्थित बड़े ताप विद्युत गृहों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) के असुरक्षित और मनमाने परिवहन ने उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिला सोनभद्र और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा कर दी है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सख्त दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक ओवरलोड ट्रक-ट्रेलर खुलेआम राख लादकर टूटी सड़कों से गुजर रहे हैं। सड़कों पर उड़ते राख के गुबार और बदहाल दृश्यता के कारण राहगीरों का दम घुट रहा है और दोपहर में भी सड़कों पर दूर तक देखना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय निवासियों व व्यापारियों में प्रशासन के इस उदासीन रवैये को लेकर गहरा आक्रोश है। प्रदूषण से आजिज आकर कोटा क्षेत्र के सड़क किनारे रहने वाली बेला गिरि नाम की एक साहसी महिला ने सोमवार सुबह अकेले ही सड़क पर उतरकर राख लदे 100 से अधिक ट्रकों को रोक दिया। महिला का आरोप था कि उड़ती राख से पूरा घर ढक चुका है और सांस लेना दूभर हो गया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस राख के परिवहन पर मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कड़े प्रतिबंध और भारी जुर्माने का प्रावधान है, वही राख उत्तर प्रदेश की सीमा में बेरोकटोक ढोई जा रही है और यूपी के रास्तों का इस्तेमाल कर दोबारा अन्य क्षेत्रों में भेजी जा रही है। नियमानुसार राख का परिवहन विशेष रूप से डिजाइन किए गए बंद वाहनों या पीवीसी कोटेड तिरपाल से पूरी तरह ढककर 40 किमी प्रति घंटे की तय गति सीमा के भीतर ही होना चाहिए। इसके अलावा, घनी आबादी वाले इलाकों से बचने, वाहनों के टायरों की धुलाई (व्हील वॉशिंग) और सड़कों पर नियमित पानी के छिड़काव के भी कड़े निर्देश हैं, लेकिन धरातल पर इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने विकास कार्यों और राख निस्तारण का समर्थन करते हुए मांग की है कि निर्धारित पर्यावरणीय गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कराया जाए और गैर-कानूनी ढंग से राख ढोने वाले वाहनों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
Author: Harsh Vardhan
9 years experience in the field of journalism.






