आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की हालत बिगड़ने और उपचार व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीचç उरमौरा स्थित पाली हॉस्पिटल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पथरी के ऑपरेशन के बाद 56 वर्षीय महिला की हालत बिगड़ गई और वाराणसी ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका के पति ने अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों पर उपचार में लापरवाही, ऑपरेशन के दौरान गलत प्रक्रिया अपनाने तथा विरोध करने पर जातिसूचक टिप्पणी और अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्नी की मौत के बाद पीड़ित पति ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज कराने और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
ये है मामला –
रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र के ग्राम होना गाँव निवासी श्रीनिवास पुत्र रामबचन के अनुसार वह 28 सितंबर को अपनी पत्नी रुकमणी (56) को पथरी के उपचार एवं ऑपरेशन के लिए उरमौरा स्थित पाली हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। शिकायत के मुताबिक अस्पताल में पत्नी को भर्ती करने के बाद 29 सितंबर को करीब 11 बजे ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जबकि श्रीनिवास को बाहर भेज दिया गया। उन्होंने आरोप है कि करीब एक घंटे बाद अस्पताल की ओर से उन्हें बुलाया गया और पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए तत्काल वाराणसी ले जाने की बात कही गई। प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया है कि ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर हुई लापरवाही के कारण महिला की हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद अस्पताल की एंबुलेंस से महिला को वाराणसी ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई।
श्रीनिवास ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया है कि पत्नी की बिगड़ती हालत और अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर जब उन्होंने अस्पताल में बात की तो डॉक्टर एवं कर्मचारियों ने उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने जातिसूचक गाली-गलौज किए जाने का भी आरोप लगाया है। पत्नी की मौत के बाद पीड़ित पति ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने, उपचार से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
“बहरहाल जिले के निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान लगातार सामने आ रही मरीजों की मौत की घटनाएं अब केवल अलग-अलग मामलों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि निजी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और नियमन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों के बीच सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है कि आखिर निजी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं और मरीजों की सुरक्षा की नियमित जांच किस स्तर पर हो रही है? ताजा मामले में महिला की मौत के बाद पति द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने इस सवाल को और मजबूती दी है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऐसे हॉस्पिटलों के विरुद्ध कोई कार्यवाही की जाती है या जाँच के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है।”






