सोनभद्र। भदोही पुलिस लाइन की इंटेलिजेंस शाखा में कार्यरत महिला हेड कांस्टेबल हीर कुंवर द्वारा अनुसूचित जनजाति के दर्जे के आधार पर किरबिल गांव में खरीदी गई जमीन का मामला अब विवादों और जांच के घेरे में आ गया है। म्योरपुर क्षेत्र के चांगा गांव निवासी हीर कुंवर पर विक्रेता रामकिशुन पनिका के परिजनों ने मुस्लिम व्यक्ति से विवाह करने के बाद भी आदिवासी पहचान का लाभ उठाकर कीमती जमीन गलत तरीके से अपने नाम कराने और बैनामा प्रक्रिया में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। विक्रेता के परिजनों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी दुद्धी अशोक गुप्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने के आदेश जारी किए हैं।
शिकायतकर्ता सुंदरी और बसंती का आरोप है कि हीर कुंवर ने चांगा गांव में क्लिनिक चलाने वाले इस्माइल खान से विवाह किया है, बावजूद इसके उन्होंने खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का दर्शाकर सड़क किनारे स्थित मूल्यवान भूखंड को कौड़ियों के भाव अपने नाम बैनामा करा लिया। परिजनों का यह भी आरोप है कि बैनामे के समय विक्रेता को बहला-फुसलाकर ले जाया गया और बाहरी गवाहों के जरिए रजिस्ट्री कराई गई। इस पूरे विवाद पर महिला पुलिसकर्मी हीर कुंवर ने अपनी सफाई में बताया कि उनकी सर्विस बुक में आज भी पिता का नाम दर्ज है और पहले पति के निधन के बाद वे आदिवासी परंपराओं के तहत ही जीवन यापन कर रही हैं, हालांकि बच्चों की पहचान में उनके पिता के रूप में इस्माइल खान का नाम दर्ज है। करीब 20 वर्ष पूर्व पेरिस में आयोजित एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर सुर्खियों में आई हीर कुंवर वर्ष 2011 में पुलिस विभाग में भर्ती हुई थीं और उनका कहना है कि उन्होंने व्यावसायिक उद्देश्य से यह जमीन खरीदी है। फिलहाल एसडीएम दुद्धी द्वारा दिए गए जांच के निर्देशों के बाद रजिस्ट्री की वैधता और सेवा अभिलेखों का सत्यापन किया जा रहा है।
Author: Harsh Vardhan
9 years experience in the field of journalism.






