महोबा/आगरा। दिल्ली से महोबा जा रही एक निजी स्लीपर बस यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसे का शिकार हो गई, जिसमें नौ बेकसूर यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर परिवहन विभाग की कार्यशैली और निजी बस संचालकों की आपराधिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। जांच में सामने आया है कि राज कल्पना ट्रेवल्स की यह अनफिट बस बिना वैध इंश्योरेंस और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बस पर पहले से 1.75 लाख रुपये के 19 चालान बकाया थे, इसके बावजूद विभिन्न आरटीओ क्षेत्रों से होकर यह गाड़ियां खुलेआम गुजरती रहीं और किसी भी जिम्मेदार अफसर ने इसे रोकने की जहमत नहीं उठाई।
यात्रियों की जान से खिलवाड़ का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पूर्व भी लखनऊ के मोहनलालगंज में बिहार से दिल्ली जा रही एक अनफिट बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। लंबी दूरी के दौरों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब आम बात बन चुकी है। नियम के मुताबिक रात भर चलने वाली बसों में दो ड्राइवरों का होना अनिवार्य है, लेकिन कमाई के चक्कर में बस ऑपरेटर सिंगल ड्राइवर के भरोसे ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्राएं तय करा रहे हैं। इसके अलावा स्लीपर कोच में अनिवार्य ‘फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम’ (एफडीएसएस) और पर्याप्त अग्निशामक यंत्रों का अभाव ऐसे हादसों में आग की लपटों को और विकराल बना देता है।
विभाग के आरटीओ और प्राइवेट फिटनेस सेंटरों की सांठगांठ से अनफिट गाड़ियों को भी फिटनेस प्रमाण पत्र बांट दिए जाते हैं, जिससे यह बसें चलते-फिरते टाइम बम में तब्दील हो जाती हैं। हालांकि लखनऊ जोन के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर लगातार चेकिंग अभियान चलाकर जुर्माना लगाया जाता है, लेकिन बस ऑपरेटर नियमों का उल्लंघन कर गाड़ियों की मूल संरचना से छेड़छाड़ करते हैं। बहरहाल, प्रशासनिक मुस्तैदी के खोखले दावों और भ्रष्ट व्यवस्था के बीच निजी बस संचालकों की लालच का खामियाजा आम यात्रियों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





