आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । डीजे के अत्यधिक शोर से सुल्तानपुर में किशोर और बलरामपुर में छात्रा की मौत की घटनाओं के बाद सोनभद्र पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है। डीजे के कानफोडू आवाज अब जानलेवा रूप लेने लगा है, इसको लेकर अब लोगों में भी भय का माहौल बन गया है। ऐसी स्थिति में डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे गंभीरता से लिया है। डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को इसे लेकर निर्देश दिया है। उन्होंने कहीं डीजे व लाउडस्वीकर की ध्वनि निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होने देने का निर्देश जारी किया है साथ ही निर्देश का सख्ती से पालन कराने का भी निर्देश दिया है। डीजीपी ने कहा कि सभी त्योहार व प्रमुख अवसरों पर डीजे व लाउडस्पीकर को निर्धारित ध्वनि सीमा में ही बजाने की अनुमति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। उनका पूरा कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जा
बताते चलें कि शहर व गांवों में शादी विवाह के साथ ही जागरण और जुलूस का दौर शुरू हो चुका है। इसके साथ ही अब डीजे पर बजने वाले कानफोड़ू गाने व संगीत भी लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। न सिर्फ हृदय रोगियों बल्कि बच्चों और किशोरियों के लिए अब ध्वनि की तीव्रता घातक साबित हो रही है। वहीं लाउड स्पीकर और डीजे की शोरगुल में बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
सितंबर से शुरू हो जाता है त्योहारों का दौर –
सितंबर के शुरुआत होते ही त्योहारों का दौरान शुरू हो गया है। चार सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया गया। इसके बाद इनकी षष्ठी कार्यक्रम हुआ। इस दौरान लोगों ने जुलूस भी निकाला। इसके साथ ही 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई गई। इस दौरान डीजे पर जुलूस भी निकाले गए। तेज आवाज में बज रहे भक्ति भजनों पर श्रद्धालु थिरकते नजर आए थे। अब शारदीय नवरात्र में भी जगह-जगह जागरण होंगे इसके बाद मूर्ति विसर्जन भी जुलूस के साथ किया जाएगा। इसमें भी डीजे का प्रयोग किया जाता है।
शादी विवाह में भी देर रात तक बनाए जाते हैं गाने –
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी के बीच ही मैरिज लॉन बनाए गए है। इसमें देर रात तक डीजे बजाया जाता है। इससे आसपास की आबादी बजने वाले कानफोड़ू संगीत से लोगों को परेशानी होती है। बीट और बास में भी आया बदलाव: कुछ वर्ष पहले तक शादी-विवाह, जुलूस और धार्मिक आयोजनों में डीजे का मतलब सीमित संख्या में स्पीकर, एम्प्लीफायर और सामान्य म्यूजिक सिस्टम माना जाता था। अब साउंड सिस्टम का स्वरूप बदल गया है। बड़े-बड़े साउंड बॉक्स, सब-वूफर, एम्प्लीफायर, अलग-अलग बास यूनिट और अधिक क्षमता वाले जनरेटर आयोजनों का हिस्सा बन गए हैं। इसके साथ ही तेज बास और लगातार ऊंचे वॉल्यूम ने ध्वनि प्रदूषण की समस्या को भी बढ़ाया है। डीजे के साथ चलने वाला जनरेटर स्वयं भी शोर का कारण। इस दौरान डीजे संचालकों द्वारा बिना साइलेंट जेनरेटर का प्रयोग किया जाना भी मुसीबत है।
रात 10 बजे के बाद नहीं बजना चाहिए डीजे –
ध्वनि विस्तारक यंत्रों में लाउडस्पीकर व साउंड बजाने की मानक ध्वनि के चार मानक हैं। इसमें आवासीय क्षेत्र में सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक 55 डेसीबल और रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक 45 डेसीबल की तय है। शांत क्षेत्र जैसे अस्पताल, स्कूल आदि के 100 मीटर के दायरे में दिन के समय 50 और रात में 40 डेसीबल का मानक है। व्यापारिक क्षेत्र में दिन में 65 व रात में 55 और औद्योगिक क्षेत्र में यह मानक दिन में 75 व रात के समय 70 डेसीबल हो जाता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए भी चिंता का कारण –
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा बताया कि “हृदय रोगियों के लिए ध्वनि की तीव्रता घातक है। खासकर जिन मरीजों को पेशमेकर, बाईपास सर्जरी या फिर हॉर्ट की अन्य सर्जरी हुई हो। तेज आवाज से ऐसे मरीजों में बेचैनी, उलझन बढ़ती है जिससे अटैक पड़ने का खतरा बना रहता है। इसलिए साउंड व लाउडस्पीकर की ध्वनि जितनी हो सके उतनी कम रखा जाए।”
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्यवाही –
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि “त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले पीस कमेटी की बैठक में बकायदा निर्देश जारी किया जाता है, लेकिन इस वर्ष नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे और मैरिज लॉन संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।”





