लखनऊ। फर्जी वाहन नंबरों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फास्टैग बनवाकर टोल राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले गिरोह के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। जांच के दौरान एसटीएफ ने अब तक ऐसे 142 वाहनों को चिह्नित किया है, जो फर्जीवाड़े के जरिए इटौंजा टोल प्लाजा से सैकड़ों बार गुजरे। इस पूरे मामले में टोल एजेंसी के कर्मचारियों और कई उच्च अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को इटौंजा टोल प्लाजा पर छापेमारी की और वहां से सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर, सर्वर तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। बताया जा रहा है कि लखनऊ-सीतापुर एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बीते छह महीनों से वांछित डाटा उपलब्ध न कराए जाने पर यह कड़ी कार्रवाई की गई। एसटीएफ को आशंका है कि अंदरूनी मिलीभगत के चलते ही डाटा देने में देरी की जा रही थी। अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से 1 जनवरी से 3 अप्रैल 2026 तक का पुराना डाटा रिकवर कराया जा रहा है ताकि कुल राजस्व नुकसान का सटीक आकलन किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर आरटीओ द्वारा सरोजनीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसकी विवेचना बाद में एसटीएफ को सौंपी गई। कार्रवाई के दौरान एसटीएफ अब तक ट्रक मालिक रियाज, उसके भाई सिराज, इंडसइंड बैंक के दो एजेंटों और हाल ही में चालक मुनीश को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है। जांच में कोर्ट के कड़े रुख और एसटीएफ की जब्ती के बाद एनएचएआई के अधिकारियों ने भी एसटीएफ कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा है। जांच एजेंसी अब जब्त डाटा का विश्लेषण कर गिरोह में शामिल अन्य बड़े चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई है।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"






