लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने और प्रदूषण पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने संयुक्त रूप से एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। शुक्रवार 18 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एनसीआर से जुड़े उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और बुलंदशहर सहित सभी आठ जिलों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के उपरांत केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि क्षेत्र में धूल प्रदूषण से निपटने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग और डीप क्लीनिंग मशीनों से सड़कों की सफाई कराने पर विशेष बल दिया जाएगा। इसके साथ ही वाहन जनित प्रदूषण को कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों को हटाने, नई ईवी नीति के प्रसार, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की अनिवार्यता और एग्रीगेटर वाहनों को ई-वाहनों में बदलने पर सहमति बनी। औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि एनसीआर के लगभग 80 प्रतिशत उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि शेष बचे उद्योगों में भी इसे जल्द अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत देश के 130 शहरों के ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ में लखनऊ के प्रथम स्थान प्राप्त करने और आगरा सहित प्रदेश के अन्य शहरों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर हर्ष जताया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लक्ष्य से अधिक पौधरोपण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। बैठक में ठोस अपशिष्ट और निर्माण व विध्वंस (C&D) अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को कड़ाई से लागू करने के साथ-साथ पराली प्रबंधन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के स्तर पर राज्यों के बीच समन्वय बनाने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
Author: Harsh Vardhan
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