बसपा से गठबंधन की कोशिशों पर बचाव की मुद्रा में आई कांग्रेस, मायावती पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा थी मुलाकात की कोशिश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। हालांकि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आगामी विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ने की बात कहकर गठबंधन की तमाम अटकलों पर पहले ही विराम लगा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। हाल ही में कांग्रेस के एससी-एसटी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और सांसद तनुज पुनिया द्वारा मंगलवार को मायावती से मिलने के किए गए प्रयास ने दोनों दलों के बीच सियासी हलचल और दूरियों को और बढ़ा दिया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद जहां बसपा कैंप इस मुलाकात की कोशिश के राजनीतिक नफा-नुकसान का बारीकी से आकलन करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लगातार सफाई देने और बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं।

बसपा के रणनीतिकारों और वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम पूरी तरह से सुनियोजित था ताकि मायावती पर इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन में शामिल होने का चौतरफा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। बसपा सुप्रीमो हाल ही में दिल्ली प्रवास से वापस राजधानी लखनऊ लौटी हैं और तब से वह लगातार पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रही हैं। मंगलवार को भले ही उनके मॉल एवेन्यू स्थित आवास से कांग्रेस नेताओं को बिना मुलाकात के ही वापस लौटना पड़ा, लेकिन बुधवार को मायावती ने बसपा की लालगंज सीट से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी इंदु चौधरी से मुलाकात कर संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाया। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यह पहल पूरी तरह से सकारात्मक थी ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट मोर्चा खड़ा किया जा सके। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह पहल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व या अत्यंत वरिष्ठ नेताओं द्वारा सीधे तौर पर की जाती, तो इसके परिणाम कुछ अलग और अधिक प्रभावी हो सकते थे। गौरतलब है कि इससे पहले मायावती के दिल्ली दौरे के दौरान भी उनकी प्रियंका गांधी से मुलाकात होने की अफवाहें तेजी से फैली थीं, और लोकसभा चुनाव 2024 के समय भी कांग्रेस ने बसपा को साथ लाने की पुरजोर कवायद की थी, जिसे मायावती ने ठुकराते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था।

कांग्रेस की इस नई चाल और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी 24 मई को लखनऊ में एक बेहद महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों, मुख्य प्रभारियों और सभी जिलों के जिलाध्यक्षों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मायावती कांग्रेस के इस ताजा रुख पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे सकती हैं और साथ ही कार्यकर्ताओं के असमंजस को दूर करते हुए संगठन को मजबूत करने तथा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी करेंगी। इसके साथ ही, बसपा ने सांगठनिक स्तर पर फेरबदल भी शुरू कर दिए हैं, जिसके तहत बुंदेलखंड के कद्दावर प्रभारी लालाराम अहिरवार को पार्टी ने अब कानपुर मंडल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है और उनसे बुंदेलखंड के कुछ जिलों का प्रभार वापस ले लिया गया है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में संगठन के भीतर कई और बड़े तथा चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे चुनाव से ठीक पहले सांगठनिक ढांचे को धार दी जा सके।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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