मीरजापुर को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य, DM ने 44 दिवसीय विशेष अभियान और शपथ के साथ दिए कड़े निर्देश

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मीरजापुर। जनपद को वर्ष 2027 तक पूरी तरह से बाल श्रम की कुप्रथा से मुक्त कराने के संकल्प के साथ प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स समिति (बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बाल श्रम को समूल नष्ट करने की रणनीति तैयार करते हुए जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ ठोस कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा जनपद में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक विशेष 44 दिवसीय अभियान का भी विधिवत शुभारम्भ किया गया। इसके साथ ही कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित सभी अधिकारियों, विभिन्न विभागों के प्रभारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बाल श्रम की रोकथाम और इसके पूर्ण उन्मूलन की गंभीरता से शपथ दिलाई गई ताकि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एक व्यापक और प्रभावी संदेश समाज में जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने बाल श्रम के मूल कारणों और उसके स्थायी निवारण पर बेहद विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल बच्चों को बाल श्रम से मुक्त करा देना ही काफी नहीं है, बल्कि बाल श्रम में चिन्हित किए गए बच्चों का शैक्षिक पुनर्वासन और उनके माता-पिता का आर्थिक पुनर्वासन अत्यंत आवश्यक है। जब तक पीड़ित परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त नहीं किया जाएगा, तब तक बाल श्रम की समस्या पर स्थायी रोक लगाना मुमकिन नहीं होगा। जिलाधिकारी ने श्रम विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, महिला कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, पुलिस एवं एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट), नियोक्ता संगठनों और स्वयंसेवी संस्था ‘आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था’ की भूमिकाओं की समीक्षा की और सभी को अपनी जिम्मेदारी पूरी संवेदनशीलता के साथ निभाने को कहा।

इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए गए कि वे बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के शैक्षिक पुनर्वासन की उचित व्यवस्था करें। साथ ही, स्कूलों से ड्राप आउट (पढ़ाई छोड़ने वाले) हो चुके बच्चों की एक विस्तृत सूची तत्काल तैयार कर श्रम विभाग को उपलब्ध कराई जाए, ताकि समय रहते ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उन्हें मजदूरी के दलदल में फंसने से बचाया जा सके। चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया गया कि जब भी 14 वर्ष से कम आयु के किसी बाल श्रमिक को चिन्हित या रेस्क्यू किया जाए, तो 24 घंटे के भीतर उसका अनिवार्य रूप से आयु परीक्षण और विस्तृत स्वास्थ्य जांच की जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पुलिस और श्रम विभाग को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।

इसके साथ ही, ग्रामीण विकास विभाग और समाज कल्याण विभाग को निर्देशित किया गया कि वे चिन्हित बाल श्रमिकों के परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं से लाभान्वित करें, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सके। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने स्पष्ट किया कि पुलिस और एएचटीयू की टीमें नियोक्ताओं पर पैनी नजर रखें और यदि कहीं भी बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। बैठक में मुख्य रूप से श्रम विभाग, बेसिक शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला कल्याण, ग्रामीण व नगरीय विकास, समाज कल्याण, पुलिस विभाग के अधिकारियों सहित ‘आस्था महिला एवं बाल विकास संस्था’ के तमाम प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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