आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । एक तरफ प्रदेश सरकार विकास की नई इबारत लिखने और सोनभद्र में विंध्य एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के निर्माण की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर सरकारी विकास के दावों को कठघरे में खड़ा कर रही है। आजादी के करीब आठ दशक गुजर जाने के बाद भी विकास खंड चोपन की ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा के ग्रामीण एक अदद सड़क और पुलिया के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट नापने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि करीब 30-32 परिवारों की जिंदगी तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग और एक अदद पुलिया के अभाव में जोखिम के साये में गुजर रही है। बरसात में उफनता नाला ग्रामीणों के लिए रास्ता नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच खड़ी चुनौती बन जाता है
इसी बदहाली और वर्षों से चली आ रही उपेक्षा के खिलाफ गुरुवार को गुलरिहवा के बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सड़क एवं पुलिया निर्माण की मांग उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि टोले तक पहुंचने वाला करीब तीन किलोमीटर का संपर्क मार्ग आज तक पक्का नहीं हो सका है। इतना ही नहीं, आवागमन के एकमात्र रास्ते में पड़ने वाले नाले पर पुलिया का निर्माण भी नहीं कराया गया। नतीजतन सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जबकि बारिश शुरू होते ही पूरा टोला मानो बाकी दुनिया से कट जाता है।
बरसात में रास्ता बंद, दाँव पर बच्चों की जिंदगी –
इस समस्या का सबसे भयावह चेहरा स्कूली बच्चों की जिंदगी में दिखाई देता है। विद्यालय जाने के लिए बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। आठवीं कक्षा की छात्रा खुशी कुमारी ने भी जिलाधिकारी से भावुक अपील करते हुए गांव में सड़क और पुलिया निर्माण कराने की मांग की। वहीं आठवीं कक्षा के छात्र विपिन कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पिछले बरसात में विद्यालय जाते समय नाला पार करने के दौरान वह तेज बहाव में बह गया था। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद गांव के एक व्यक्ति ने समय रहते उसे बचा लिया, अन्यथा उसकी जान भी जा सकती थी।
एक मासूम छात्र का इस तरह पानी के तेज बहाव में बह जाना महज हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल है, जहां बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए भी अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। सवाल यह भी है कि यदि उस दिन बच्चे को बचाने वाला कोई मौजूद नहीं होता तो आखिर इस अनहोनी की जिम्मेदारी किसकी होती?
कोई बीमार पड़ जाए कोई तो अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती –
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क और पुलिया के अभाव में केवल स्कूली बच्चों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं, बुजुर्गों और मजदूरों को भी रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गांव में किसी के बीमार पड़ने या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। बरसात के दिनों में नाला उफान पर होने से आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सुविधाओं की पहुंच भी बड़ी चुनौती बन जाती है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग किया कि ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा में लगभग तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग का निर्माण कराया जाए। साथ ही रास्ते में पड़ने वाले नाले पर प्राथमिकता के आधार पर पक्की पुलिया बनवाई जाए। संबंधित विभाग के अधिकारियों से स्थलीय निरीक्षण कराकर निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने और जल्द बजट स्वीकृत कराकर काम शुरू कराने की मांग भी की गई।
इस दौरान पलटन, उदय कुमार, मुन्नी लाल, रामकेश, रमाशंकर, सत्यनारायण, नंदकुमार, लवकुश कुमार, रमाशंकर यादव, सोनू, विपिन, उमेश, विमलेश, आशु मिश्रा, अजीत यादव, राहुल, अमित, अनूप, मनोज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





