आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । मतदाता सूची से किसी का नाम कटवाने के लिए फार्म-7 के माध्यम से झूठी और मनगढ़ंत शिकायत करना अब भारी पड़ सकता है। निर्वाचन नामावली के पुनरीक्षण और शुद्धीकरण की प्रक्रिया में फार्म-7 के दुरुपयोग को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर गलत जानकारी देने अथवा झूठी घोषणा करने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान है।
जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी चर्चित गोंड ने बताया कि “भारत निर्वाचन आयोग ने निर्वाचकों को व्यक्तिगत रूप से बल्क में फार्म-7 उपलब्ध कराने की सीमा के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही निर्वाचन नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण और शुद्धीकरण के दौरान मिथ्या घोषणा करने वालों के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित हैं। उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत यदि कोई व्यक्ति निर्वाचक नामावली में किसी प्रविष्टि को शामिल कराने अथवा हटवाने के संबंध में जानबूझकर ऐसा कथन या लिखित घोषणा करता है, जिसके गलत होने की उसे जानकारी या विश्वास है अथवा जिसके सही होने का उसे विश्वास नहीं है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामले में दोषी को एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं।”
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के संज्ञान में फार्म-7 के माध्यम से की गई कोई शिकायत झूठी अथवा मनगढ़ंत पाई जाती है तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
सही जानकारी के साथ ही करें फार्म-7 का इस्तेमाल –
जिला निर्वाचन अधिकारी ने जनपद के नागरिकों से अपील की है कि निर्वाचक नामावली से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराने अथवा फार्म-7 भरने के दौरान पूरी तरह सही और तथ्यात्मक जानकारी ही उपलब्ध कराएं। किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए व्यक्तिगत रंजिश, दुर्भावना अथवा गलत मंशा से झूठी शिकायत करने से बचें।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





