आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों का धरना स्थगित होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की गाड़ी पटरी पर लौटती नहीं दिख रही है। संविदा एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के काम पर नहीं लौटने से टीकाकरण और इलाज प्रभावित रहने की बात सामने आई है। वहीं आज नवहिंद समाचार की पड़ताल में आयुष्मान आरोग्य मंदिर सरंगा के गेट पर ताला लटका मिला। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने दावा किया कि केंद्र पिछले एक सप्ताह से बंद है और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की हड़ताल पहले से जारी थी, तो स्वास्थ्य विभाग ने जरूरी सेवाएं चालू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की? स्थिति की जानकारी लेने के लिए सीएमओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नंबर नॉट रिचेबल आया।
धरना स्थगित होने की घोषणा, जमीनी हकीकत में स्वास्थ्य सेवाएं मिली बेपटरी –
एनएचएम कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर मिशन निदेशक से वार्ता के बाद धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया था। संगठन की ओर से 17 अक्टूबर से काम पर लौटने की बात कही गई। उम्मीद थी कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही बाधाएं दूर होंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण समेत नियमित स्वास्थ्य गतिविधियां फिर से सुचारु हो जाएंगी। लेकिन जिले में संविदा एएनएम और सीएचओ के काम पर नहीं लौटने की स्थिति सामने आने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि धरना स्थगित होने के बाद भी सेवाओं की बहाली सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी। इसका सीधा असर उन ग्रामीणों पर पड़ रहा है, जो बच्चों के टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और दूसरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी केंद्रों पर निर्भर हैं। कर्मचारियों की मांगों और विभागीय निर्णयों के बीच आम मरीजों की जरूरतें प्रभावित हों, तो जिम्मेदार व्यवस्था से जवाब मांगना लाजिमी है।
हड़ताल के दौरान क्यों नहीं किए गए वैकल्पिक इंतजाम –
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल कोई अचानक पैदा हुई परिस्थिति नहीं थी। आंदोलन जारी रहने के दौरान ही स्वास्थ्य विभाग के सामने यह चुनौती थी कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति में भी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों। ऐसे में प्रभावित केंद्रों पर वैकल्पिक स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती, टीकाकरण सत्रों के संचालन और नियमित निगरानी के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए थी लेकिन सरंगा के आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर ताला मिलने और टीकाकरण प्रभावित होने की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। क्या हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की नियमित समीक्षा की गई? क्या वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था की गई थी? यदि इंतजाम किए गए थे, तो उनका लाभ ग्रामीणों तक क्यों नहीं पहुंचा? और यदि व्यवस्था नहीं की गई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग को देना चाहिए। कर्मचारियों की हड़ताल अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने की जिम्मेदारी से विभाग पूरी तरह अलग नहीं हो सकता।
सरंगा में एक सप्ताह से केंद्र बंद होने का ग्रामीणों का दावा –
नवहिंद समाचार की पड़ताल के दौरान आयुष्मान आरोग्य मंदिर सरंगा के गेट पर ताला लटका मिला। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र पिछले एक सप्ताह से बंद है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन जब केंद्र ही बंद मिले, तो इस व्यवस्था का लाभ जरूरतमंदों तक कैसे पहुंचेगा? खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, केंद्र बंद रहने के कारणों और संबंधित कर्मचारियों की अनुपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इस संबंध में विभागीय स्तर पर जांच और स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
सीएमओ से संपर्क का प्रयास, सीयूजी नंबर मिला नॉट रिचेबल –
आयुष्मान आरोग्य मंदिर सरंगा पर ताला लटकने और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नंबर नॉट रिचेबल आया। इस कारण खबर लिखे जाने तक इस मामले में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
एक महीने की मोहलत, कार्यवाही नहीं हुई तो फिर बजेगा आंदोलन का बिगुल –
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्ला ने धरना स्थगित किए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि मिशन निदेशक के साथ वार्ता के बाद कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिला है। इसी के मद्देनजर फिलहाल धरना स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने शासन और संबंधित अधिकारियों को मांगों पर प्रभावी कार्यवाही के लिए एक महीने का समय दिया है। निर्धारित अवधि में ठोस कार्यवाही नहीं होने पर आंदोलन दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





