आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । त्योहारी सीजन में बाजारों की बढ़ती रौनक, दुकानों में बिजली की झालरें और जगह-जगह आतिशबाजी के बीच आगजनी की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों की जान-माल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। लेकिन सोनभद्र में आग बुझाने और लोगों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी संभालने वाला यही विभाग कर्मचारियों की भारी कमी और जर्जर भवन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। विभाग में स्वीकृत 75 पदों के सापेक्ष महज 36 पदों पर तैनाती है, जबकि 39 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आपात स्थिति में जब एक साथ कई जगह आग लगने की घटनाएं सामने आएंगी, तब सीमित कर्मचारियों के भरोसे विभाग कितनी तत्परता से मोर्चा संभाल सकेगा।
39 पद खाली, कर्मचारियों की कमी बनी चुनौती –
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अग्निशमन विभाग में मुख्य अग्निशमन अधिकारी का एक पद स्वीकृत है, जिस पर तैनाती है। वहीं अग्निशमन अधिकारी के तीनों पद रिक्त हैं। अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के चार स्वीकृत पदों के सापेक्ष एक पद पर तैनाती है और तीन खाली हैं। इसी तरह लीडिंग फायरमैन के सात पदों में चार भरे हैं, जबकि तीन रिक्त हैं। फायर सर्विस चालक के सात पदों में तीन पर कर्मचारी तैनात हैं और चार खाली पड़े हैं। सबसे अहम फायरमैन के 53 स्वीकृत पदों के सापेक्ष महज 27 कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 26 पद रिक्त हैं
इसके अलावा एएसआईएम के तीनों पद खाली हैं। रसोई व्यवस्था से जुड़े कुक/कहार के छह पदों में पांच पर तैनाती है, जबकि एक पद रिक्त है। स्वीपर के तीनों पद भरे हुए हैं। इस तरह कुल 75 स्वीकृत पदों में से 36 पर कर्मचारी तैनात हैं और 39 पद खाली पड़े हैं। यानी विभाग के स्वीकृत मानव संसाधन का आधे से भी कम हिस्सा उपलब्ध है। हालांकि, विभागीय आंकड़ों में कुक/कहार के दो और स्वीपर के दो पद आउटसोर्सिंग से जुड़े है। वहीं कर्मचारियों की कमी के बीच अग्निशमन विभाग के पास आग बुझाने के लिए विभिन्न क्षमता के वाहन और उपकरण उपलब्ध हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 4500 से 5000 लीटर क्षमता वाले तीनों वाटर टेंडर क्रियाशील हैं, जबकि 2000 से 2500 लीटर क्षमता वाले दोनों वाटर टेंडर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा 450 लीटर क्षमता की हाई प्रेशर मिस्ट मशीन, 750 लीटर क्षमता का क्विक रिस्पांस व्हीकल और फायर बुलेट भी उपलब्ध संसाधनों में शामिल हैं।
आग लगने पर बढ़ जाती है चुनौती –
आगजनी की घटना के दौरान अग्निशमन विभाग को तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के साथ ही आसपास के लोगों को सुरक्षित निकालने, आग को दूसरी जगह फैलने से रोकने और जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। ऐसे में पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
सोनभद्र जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत जनपद में आग की घटनाओं पर समय से काबू पाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। यदि कर्मचारियों की कमी के बीच एक से अधिक स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हो जाएं तो उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। त्योहारी सीजन में बाजारों, प्रतिष्ठानों और आवासीय इलाकों में आग से बचाव के इंतजामों की निगरानी भी जरूरी हो जाती है। ऐसे में रिक्त पदों का सवाल केवल विभागीय व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
तीन कमरों के जर्जर भवन में चल रही सेवाएं –
कर्मचारियों की कमी के साथ ही विभाग की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र की अग्निशमन सेवाएं आज भी डायट परिसर स्थित तीन कमरों के जर्जर भवन से संचालित हो रही हैं। लंबे समय से विभाग अपने भवन के लिए प्रयासरत है, लेकिन अब तक जमीन चिन्हित किए जाने से आगे की प्रक्रिया को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है। भवन निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाना विभाग की दुश्वारियों को और बढ़ा रहा है।
एक तरफ विभाग को आग जैसी आपात स्थितियों में तत्काल कार्रवाई करनी होती है, वहीं दूसरी तरफ उसके पास अपना व्यवस्थित भवन तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल यह भी है कि अग्निशमन कर्मियों को बेहतर कार्यस्थल और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अब तक ठोस पहल क्यों नहीं हो सकी। विभाग के लिए स्थायी भवन की व्यवस्था करना केवल कर्मचारियों की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
जनता से जुड़ा विभाग, फिर भी जनप्रतिनिधियों की निगाहों से महरूम –
अग्निशमन विभाग सीधे तौर पर आम जनता की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा है। किसी घर, दुकान, प्रतिष्ठान या सार्वजनिक स्थान पर आग लगने की स्थिति में लोगों की उम्मीद सबसे पहले अग्निशमन विभाग से ही होती है। इसके बावजूद कर्मचारियों के रिक्त पदों और जर्जर भवन जैसी समस्याओं का लंबे समय तक बने रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। विभागीय आंकड़े जहां 39 पदों के खाली होने की स्थिति बयां कर रहे हैं, वहीं स्थायी भवन का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाना भी ध्यान देने योग्य है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं कि आम जनता की सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग की समस्याओं को दूर कराने के लिए कितनी प्रभावी पहल की गई है। क्षेत्र की अन्य विकास योजनाओं के साथ आपातकालीन सेवाओं की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्रीराम साहनी ने बताया कि “कर्मचारियों की कमी के बावजूद अग्निशमन विभाग पूरी तत्परता और मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है। विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को लगातार रिक्त पदों की सूची भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि अग्निशमन विभाग के स्थायी भवन निर्माण के लिए लोढ़ी टोल प्लाजा के पास भूमि चिन्हित कर ली गई है। उम्मीद है कि जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे विभागीय कार्यों के संचालन में और सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि आगजनी की घटनाओं से निपटने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है।”
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






