Sonbhadra News : लेखपालों ने ठप किया ऑनलाइन काम, व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ प्रशासन की बढ़ाई मुश्किलें

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । अतिरिक्त चार्ज दिए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे जिले के लेखपालों ने अब आर-पार की लड़ाई का रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार से लेखपालों ने सभी ऑनलाइन कार्य बंद करने के साथ ही तहसील प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए। लेखपालों के इस कदम से तहसीलों में पहले से प्रभावित कामकाज पर और असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों से लेकर वरासत, खतौनी, अंश संशोधन और फार्मर रजिस्ट्री जैसे जरूरी कार्य प्रभावित होने से छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और किसान परेशान हैं। वहीं, विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अपने काम के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

22 सितंबर से आंदोलनरत हैं लेखपाल –

लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला ने बताया कि “प्रत्येक लेखपाल को अपने मंडल के अतिरिक्त दूसरे मंडलों का भी चार्ज सौंप दिया गया है। इसके अलावा उनसे विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्य भी कराए जा रहे हैं। इससे लेखपालों के सामने कामकाज को लेकर कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इन्हीं मांगों को लेकर जिले की सभी तहसीलों के लेखपाल 22 सितंबर से हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में लेखपालों ने अतिरिक्त मंडलों का कार्य बंद कर संबंधित बस्ते तहसीलों में जमा कर दिए थे। अब गुरुवार से सभी ऑनलाइन कार्य भी बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही तहसील प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए गए हैं। लेखपालों का कहना है कि मांगों के समाधान को लेकर आंदोलन जारी है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक, थाना दिवस पर भी लेखपाल काली पट्टी बांधकर पहुंचेंगे, लेकिन कोई कार्य संपादित नहीं करेंगे।”

एक लाख से अधिक आवेदन लंबित, जनहित गारंटी योजना पर असर –

लेखपालों की हड़ताल से जिले की आठ तहसीलों में जनहित गारंटी योजना के तहत होने वाले कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार, आय, जाति, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों के बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। ऑनलाइन कार्य बंद होने से इन आवेदनों के निस्तारण में और देरी होने की आशंका है। इसके अलावा वरासत, खतौनी, अंश संशोधन, अंश निर्धारण और फार्मर रजिस्ट्री जैसे राजस्व संबंधी कार्य भी प्रभावित हो गए हैं। इन कार्यों के लिए तहसीलों पर निर्भर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। समय से प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर जहां सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है, वहीं राजस्व संबंधी कार्यों के लंबित रहने से किसानों को भी इंतजार करना पड़ रहा है।

छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी परेशान –

लेखपालों की हड़ताल का असर उन छात्रों और अभ्यर्थियों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें छात्रवृत्ति, नौकरी के आवेदन और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों की जरूरत है। निर्धारित समयसीमा में दस्तावेज उपलब्ध कराने की चिंता के बीच अभ्यर्थियों को तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी प्रमाण पत्रों का निस्तारण नहीं हो पाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।वहीं, किसानों को खतौनी में नाम संशोधन, भूमि संबंधी मामलों और फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। राजस्व विभाग से जुड़े इन कार्यों में देरी का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है।

आज काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध, कामकाज रहेगा ठप –

लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला ने बताया कि “आंदोलन के तहत गुरुवार से ऑनलाइन कार्य बंद करने के साथ ही तहसील प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप भी छोड़ दिए गए हैं। थाना दिवस पर लेखपाल काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे, लेकिन किसी भी तरह का कार्य संपादित नहीं करेंगे। लेखपाल अपनी मांगों के समाधान की मांग पर अड़े हुए हैं।”

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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