प्रेम प्रकाश, वाराणसी। बहुचर्चित कोडीन कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट के आरोपियों पर पुलिस और न्यायालय का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले के मुख्य आरोपी कायस्थ टोला (आदमपुर) निवासी ₹50 हजार के इनामी भगोड़े शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली जायसवाल उर्फ वैशाली पोसवानी के खिलाफ अदालत ने गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कफ सिरप तस्करी के जरिए अर्जित अवैध कमाई का इस्तेमाल वैशाली के नाम पर शराब ठेका और सिगरा क्षेत्र में बेनामी संपत्तियां खरीदने में किया गया था। पति शुभम के साथ वैशाली भी फरार चल रही है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें जगतगंज स्थित आवास व संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। गौरतलब है कि मामले में मुख्य सरगना का पिता भोला प्रसाद जायसवाल पहले से ही सोनभद्र जेल में बंद है, जबकि भगोड़े शुभम की तलाश में इंटरपोल भी जुटी हुई है।
इसी मामले में रोहनिया पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने शुभम जायसवाल को फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने वाले श्यामभवी फार्मा के प्रोपराइटर विकास सिंह को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी वरुणा जोन राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि विकास सिंह ने जानते हुए कि शुभम उसकी फर्म में कभी कार्यरत नहीं था, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दो वर्ष का फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र दिया था। इसी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर रांची की शैली ट्रेडर्स का पंजीकरण कराया गया, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित फेन्साडिल कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी कर अकूत अवैध धन कमाया गया। रोहनिया पुलिस ने आरोपी विकास सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं एसआईटी और पुलिस की अन्य टीमें गिरोह के अन्य सहयोगियों व रिश्तेदारों की जानकारी जुटाकर आगे की विधिक कार्रवाई कर रही हैं।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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