लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को ही दोबारा प्रशासक नियुक्त किए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को साफ शब्दों में निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई पर अदालत को यह स्पष्ट रूप से बताए कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने चुनाव की तारीखों का ब्योरा सौंपने के निर्देश देने के साथ ही राज्य सरकार को भी तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि पंचायत चुनाव के मद्देनजर गठित किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट को आगामी 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए।
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह तल्ख आदेश स्थानीय नागरिक ओमप्रकाश प्रजापति द्वारा दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद बुधवार को पारित किया। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों के प्रधानों का संवैधानिक कार्यकाल पूरा हो चुका है, जिसके बाद राज्य सरकार ने एक विशेष आदेश जारी करके उन्हीं निवर्तमान प्रधानों को उनकी संबंधित ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नियुक्त कर काम जारी रखने की अनुमति दे दी थी। याचिकाकर्ता ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह से पंचायती राज कानून की मूल मंशा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी है। इस मामले में मंगलवार को हुई बहस के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने याचिका पर बेहद जल्दबाजी में 3 जून को ही विस्तार से सुनवाई करने का विशेष आग्रह किया था, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया था।
बुधवार को कोर्ट रूम में हुई तीखी बहस के बाद याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि माननीय अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नवगठित ओबीसी आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कम से कम छह महीने का समय लगेगा। दरअसल, पंचायत चुनाव में सीटों के चक्रानुक्रम आरक्षण आदि के नए सिरे से निर्धारण के लिए राज्य सरकार ने इस समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है, और सरकार का तर्क था कि इस आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सूबे में पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव टालने के लिए छह महीने का लंबा इंतजार नहीं किया जा सकता और अब सरकार को आगामी 10 जुलाई को ही इस आयोग की प्रगति रिपोर्ट अदालत की मेज पर रखनी होगी। हाईकोर्ट के इस बेहद कड़े और आक्रामक रुख के बाद अब राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अब उन्हें न सिर्फ तय समय सीमा के भीतर ओबीसी आरक्षण की स्थिति साफ करनी होगी, बल्कि अदालत को पंचायत चुनाव संपन्न कराने का पूरा शेड्यूल भी सौंपना होगा।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





