सोनभद्र। जनपद में पर्यावरण संरक्षण, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और गंगा व उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में जनपद के भीतर पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने, वन क्षेत्र को बढ़ाने तथा जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कड़े लहजे में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पर्यावरण और स्वच्छता के कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने शासन द्वारा निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्य के अनुरूप सभी विभागों को समय से अपनी तैयारियां पूरी करने को कहा। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि केवल पौधों को लगाना ही हमारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि लगाए जाने वाले पौधों की पुख्ता सुरक्षा और उनकी जीवितता (सर्वाइवल रेट) सुनिश्चित करना सबसे अहम कार्य है। इसके लिए उन्होंने पूर्व के वर्षों में कराए गए वृक्षारोपण कार्यों की भी गहन समीक्षा की और संबंधित विभागों को पूर्व में रोपे गए पौधों का नियमित निरीक्षण एवं प्रभावी निगरानी करने हेतु निर्देशित किया। इसके पश्चात जिला पर्यावरण समिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने वायु और भूमि प्रदूषण को रोकने के लिए सड़क धूल (रोड डस्ट) नियंत्रण, घरेलू व व्यावसायिक अपशिष्टों (कचरे) के समुचित निस्तारण, शहरी व ग्रामीण इलाकों में कचरे की अवैध डंपिंग को पूरी तरह से रोकने, प्लास्टिक एवं निर्माण अपशिष्ट (मलबे) के सही प्रबंधन तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने जिले के सभी निकायों के अधिशासी अधिकारियों (ईओ) को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि वे अपने-अपने नगरीय और कस्बाई क्षेत्रों में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित कराएं। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को विशेष प्रवर्तन अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ जब्ती और जुर्माने की प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जनमानस की भागीदारी भी बेहद जरूरी है, जिसके लिए पूरे जनपद में व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। इसके साथ ही बैठक में जीडीपीएमएस (GDPMS) पोर्टल पर विभागीय सूचनाओं की समयबद्ध अपलोडिंग और ग्राम गंगा समितियों द्वारा ग्रामीण स्तर पर संचालित की जा रही स्वच्छता व जागरूकता गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। सीडीओ ने जिले के पारंपरिक पेयजल स्रोतों, तालाबों, पोखरों एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण तथा उनके पुनर्जीवन कार्यों की प्रगति पर चर्चा करते हुए इन्हें मनरेगा व अन्य योजनाओं के जरिए संवारने के आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
बैठक के अंतिम चरण में जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के पुनरोद्धार, नदियों में गिरने वाले नालों की टेपिंग, उनकी स्क्रीनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन कार्यों की वर्तमान प्रगति को देखा गया। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अभियंताओं और अधिकारियों को नदी तटों की स्वच्छता हर हाल में बनाए रखने तथा जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी एवं सतत जमीनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की हिदायत दी। उन्होंने चेतावनी दी कि नदियों में किसी भी प्रकार का गंदा पानी या रासायनिक अपशिष्ट सीधे नहीं गिरना चाहिए। इस महत्वपूर्ण त्रैमासिक समीक्षा बैठक में वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, पंचायती राज विभाग, जल निगम, भूमि संरक्षण और सिंचाई विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
Author: Vinod Garg
2 years experience in the field of journalism.





