सनातन धर्म में ऐतिहासिक संयोग: पहली बार एक ही दिन पड़ेगा बड़ा मंगल और गंगा दशहरा, इस दुर्लभ मुहूर्त में दान और स्नान से मिटेंगे सारे पाप और दोष

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 इस वर्ष की ज्येष्ठ पूर्णिमा और ज्येष्ठ मास के मंगलवार सनातन परंपरा के अनुयायियों के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रहे हैं, क्योंकि अध्यात्म के इतिहास में पहली बार ‘बड़ा मंगल’ और पावन ‘गंगा दशहरा’ का एक अत्यंत दुर्लभ और महासंयोग एक ही दिन बनने जा रहा है। इस अनूठे संयोग के चलते समूची प्रांतीय राजधानी बजरंगबली के गगनभेदी जयकारों और पतितपाविनी मां गंगा की अनन्य भक्ति के अनूठे रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आने वाली है। इस महामुहूर्त के अवसर पर जहां एक ओर संकटमोचन हनुमान जी के तमाम छोटे-बड़े मंदिरों में श्रद्धा, अटूट आस्था और जनसेवा का अद्भुत महासंगम देखने को मिलेगा, वहीं दूसरी ओर अलसुबह से ही आदिगंगा गोमती के पावन घाटों पर भी श्रद्धालुओं की आस्था का जनसैलाब उमड़ने वाला है। संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रख्यात आचार्य प्रोफेसर अश्विनी पांडेय के अनुसार, ज्योतिषीय गणना के इतिहास में बड़ा मंगल और गंगा दशहरा का एक ही तिथि पर पड़ना अपने आप में एक अभूतपूर्व व कल्याणकारी घटना है।

आचार्य प्रो. अश्विनी पांडेय ने इस विशिष्ट योग की महत्ता को स्पष्ट करते हुए बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण से यह पहली बार घटित हो रहा है जब ज्येष्ठ मास का बड़ा मंगल और गंगा जी का अवतरण दिवस यानी गंगा दशहरा एक साथ मनाया जा रहा है। इसके साथ ही, इस बार के घटनाक्रम में मलमास (अधिकमास) की विशेष उपस्थिति ने इस दिन की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता को सामान्य दिनों की तुलना में कई हजार गुना अधिक बढ़ा दिया है। इससे पहले धार्मिक इतिहास में कभी भी ऐसा त्रिवेणी संयोग नहीं देखा गया जब मलमास, बड़ा मंगल और गंगा दशहरा तीनों एक ही कालखंड में एक साथ विद्यमान रहे हों। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दुर्लभतम कालखंड में की जाने वाली पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यों से साधकों को अनंत गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी। मान्यता है कि इस पावन घड़ी में पवित्र नदी में डुबकी लगाकर पूर्ण विधि-विधान से पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से मनुष्य के जीवन के दसों प्रकार के कायिक, वाचिक और मानसिक पाप व विकार समूल नष्ट हो जाते हैं।

इस महासंयोग के दिन सार्वजनिक भंडारा आयोजित करना और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना सर्वोपरि एवं अत्यंत फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन ही भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था, इसीलिए इस पावन पर्व पर गंगा स्नान के बाद प्रत्येक पूजन सामग्री और दान की जाने वाली वस्तुओं को ‘दस’ की संख्या में (जैसे दस फल, दस दीप, दस अन्न या दस वस्त्र) दान करने का विधान है, जिससे साधक पर मां गंगा और संकटमोचन हनुमान जी की संयुक्त असीम कृपा बरसती है। इस महापर्व को लेकर राजधानी के लेटे हुए हनुमान मंदिर, हनुमान सेतु मंदिर और हनुमत धाम सहित सभी प्रमुख देवालयों में विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। गोमती तट स्थित प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत डॉ. विवेक तांगड़ी ने बताया कि इस पावन अवसर पर बजरंगबली के विशेष श्रृंगार के साथ-साथ आदिगंगा मां गोमती की महाआरती उतारी जाएगी और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इन सभी प्रमुख मंदिरों में दिनभर सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ मां गंगा की सामूहिक महाआरती का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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