लखनऊ। उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय व्यवस्था और ग्रामीण राजनीति से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में समय पर पंचायत चुनाव संपन्न न हो पाने की स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा था, जिससे ठीक एक दिन पहले सोमवार देर शाम पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक शासनादेश जारी कर दिया। दरअसल, कार्यकाल समाप्त होने की अवधि नजदीक आते देख विभिन्न ग्राम प्रधान संगठनों द्वारा लगातार सरकार से यह मांग की जा रही थी कि जब तक आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही गांव का विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था चलाने की अनुमति दी जाए। जनहित और ग्रामीण विकास की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने इस पर अपनी मुहर लगा दी। इस निर्णय के लागू होने के साथ ही प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार होगा जब गांवों में सुचारू कामकाज के लिए एक विशेष प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा। सरकार के इस कदम से उत्तर प्रदेश की कुल 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों के प्रधानों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
कार्यकाल बढ़ाए जाने के इस बड़े फैसले के साथ ही राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रास्ता साफ करने और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए विधि सम्मत आरक्षण तय करने की दिशा में भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार द्वारा ‘राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ के गठन की प्रक्रिया को पूरी तरह से मुकम्मल कर लिया गया है। पंचायती राज विभाग की ओर से सोमवार को जारी की गई एक अन्य महत्वपूर्ण अधिसूचना में इस समर्पित आयोग के अध्यक्ष और सभी सम्मानित सदस्यों के नामों की विधिवत घोषणा कर दी गई है। जारी अधिसूचना के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को इस नवगठित पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही आयोग को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और सेवानिवृत्त अधिकारी एसपी सिंह को बतौर सदस्य टीम में शामिल किया गया है।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस समर्पित आयोग के अध्यक्ष और सभी सदस्यों की यह महत्वपूर्ण नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर अगले छह महीने की तय अवधि के लिए मान्य होगी। यह आयोग उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण की व्यवस्था को सुसंगत और त्रुटिहीन बनाने के लिए जमीनी आंकड़ों का गहन परीक्षण, सर्वे और मूल्यांकन करेगा। इसके बाद आयोग अपनी विस्तृत और प्रामाणिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर ही चुनाव में सीटों के आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार ने इससे पूर्व 18 मई 2026 को इस आयोग के गठन से संबंधित शुरुआती अधिसूचना जारी की थी। अब अध्यक्ष और सदस्यों के नामों की अंतिम मुहर और तैनाती के साथ ही राज्य में पंचायत चुनाव की आरक्षण व्यवस्था को अंतिम रूप देने की कानूनी प्रक्रिया में भारी तेजी आएगी। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि छह महीने के भीतर आयोग की रिपोर्ट आने और आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तारीखों का बिगुल फूंक दिया जाए
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Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





