मां विन्ध्यवासिनी विंध्य विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लेटलतीफी पर बिफरे अफसर: मण्डलायुक्त और जिलाधिकारी ने किया औचक निरीक्षण, 20 जून तक कार्य पूर्ण करने की अंतिम डेडलाइन

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मीरजापुर। निर्माणाधीन मां विन्ध्यवासिनी विंध्य विश्वविद्यालय के कार्य की कछुआ गति और मौके पर मजदूरों की कमी देखकर प्रशासनिक अमला बेहद सख्त रुख में नजर आ रहा है। रविवार को मण्डलायुक्त विन्ध्याचल मण्डल राजेश प्रकाश और जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने मड़िहान के देवरी स्थित विश्वविद्यालय परिसर का अचानक औचक निरीक्षण किया। दोनों आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक भवन, शैक्षणिक और एकेडमिक ब्लॉक के एक-एक हिस्से का बारीकी से मुआयना किया और वहां चल रहे सिविल, इलेक्ट्रिकल व फिनिशिंग कार्यों की गुणवत्ता को परखा। निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर मजदूरों और राजमिस्त्रियों की संख्या बेहद कम पाए जाने पर मण्डलायुक्त ने कार्यदायी संस्था और अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो टूक शब्दों में लोक निर्माण विभाग, भवन निर्माण खण्ड के अभियंताओं को अल्टीमेटम दिया कि आगामी 20 जून 2026 तक हर हाल में प्रशासनिक और एकेडमिक ब्लॉक के समस्त कार्य पूर्ण कर लिए जाएं, अन्यथा लेटलतीफी की दशा में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित फर्म के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

परिसर का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद मण्डलायुक्त व जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय के मीटिंग हॉल में संबंधित महकमों के अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। बैठक में कार्य की धीमी रफ्तार पर असंतोष जताते हुए मण्डलायुक्त ने कहा कि विश्वविद्यालय का नया शैक्षणिक सत्र आगामी जुलाई महीने से प्रस्तावित है। छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि 20 जून तक हर हाल में सारे निर्माण कार्य खत्म कर भवन को हैंडओवर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि समय से शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से शुरू किया जा सके। उन्होंने निर्माण गति को रफ्तार देने के लिए शिफ्टवार मजदूरों की संख्या तुरंत बढ़ाने और प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए। बैठक में विश्वविद्यालय परिसर के भीतर जलापूर्ति की समस्या पर भी गहन मंथन हुआ। मण्डलायुक्त ने भू-गर्भ जल विभाग और जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे कैंपस और उसके आसपास के क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता का व्यापक सर्वे करें और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपें ताकि बोरिंग के जरिए पेयजल की स्थाई व्यवस्था हो सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि आसपास के किसी अन्य स्रोत से पानी लिफ्ट करके लाया जा सकता हो, तो उसकी कार्ययोजना भी तत्काल प्रस्तुत की जाए।

वहीं समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्य मार्ग से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक जाने वाले पहुंच मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसे कैंपस के अंदर की अंदरूनी सड़कों और सीवर लाइन के साथ आगामी 20 जून तक प्रत्येक दशा में पूरा करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कैंपस लाइटिंग, विद्युतीकरण और पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर मुकम्मल करने की हिदायत दी। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि तय समय सीमा के भीतर यदि मानक के अनुसार कार्य पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित फर्म का भुगतान तत्काल रोक दिया जाएगा और भारी पेनाल्टी (जुर्माना) भी लगाई जाएगी। पर्यावरण संरक्षण और परिसर को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिया कि वे संयुक्त रूप से उपयुक्त स्थानों का चयन कर लें, ताकि कैंपस के बीच-बीच में और बाउंड्रीवॉल व सड़कों के किनारे पीपल, बरगद, नीम, पाकड़ जैसे विशाल व छायादार पौधों का सुनियोजित तरीके से वृक्षारोपण किया जा सके। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण और बैठक के दौरान पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार, मां विन्ध्यवासिनी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राम नरायन, लोक निर्माण विभाग (भवन निर्माण), विद्युत विभाग, जल निगम और भू-गर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंताओं सहित तमाम संबंधित विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

Vinod Garg
Author: Vinod Garg

2 years experience in the field of journalism.

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