लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नई तबादला नीति का शासनादेश जारी कर दिया है। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज द्वारा मंगलवार को जारी इस आदेश के तहत अब कर्मचारी बच्चों की शिक्षा, बीमारी या अन्य व्यक्तिगत कारणों से परस्पर सहमति (म्यूचुअल) के आधार पर तबादला पा सकेंगे। शासनादेश के अनुसार, यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही जिले या स्थान पर तैनात किया जाएगा। साथ ही, गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती उनके अनुरोध वाले स्थान पर प्राथमिकता के आधार पर करने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान सत्र के लिए तबादलों की प्रक्रिया 31 मई तक पूरी की जाएगी और स्थानांतरित कर्मियों को निर्धारित समय के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें स्वतः कार्यमुक्त मान लिया जाएगा।
स्थानांतरण नीति के साथ ही सरकार ने भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया में भी ऐतिहासिक बदलाव किया है। अब चयन वर्ष की गणना जुलाई के बजाय एक जनवरी से दिसंबर तक की जाएगी। यह नई व्यवस्था एक जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। इसके अतिरिक्त, न्यायिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पीसीएस-जे अधिकारियों के लिए उच्चतर न्यायिक सेवा (HJS) के द्वार खोल दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (उन्नीसवां संशोधन) नियमावली-2026 के अनुसार, अब वकालत और न्यायिक सेवा को मिलाकर सात वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिकारी एचजेएस भर्ती के लिए पात्र होंगे। सरकारी वकीलों और अभियोजकों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है, बशर्ते उन्होंने आवेदन से पूर्व सात वर्ष की निरंतर प्रैक्टिस पूरी कर ली हो। सरकार के इन फैसलों से जहाँ प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं हजारों कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों को करियर में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





