Sonbhadra News : कहीं डॉक्टर गायब, कहीं न नवीनीकरण नदारद! जिले के एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों पर डीएम की नजर टेढ़ी, जल्द गिर सकती है गाज

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले में निजी अस्पतालों के संचालन की व्यवस्था में लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी अब खुलकर सामने आने लगी है। मरीजों को बेहतर इलाज और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावों के बीच कहीं पंजीकृत एमबीबीएस चिकित्सक अस्पताल से नदारद मिल रहे हैं तो कहीं पंजीकरण का नवीनीकरण कराए बिना ही अस्पतालों का संचालन हो रहा है। हैरानी यह है कि इन अस्पतालों की निगरानी का जिम्मा संभालने वाले स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले तीन माह में की गई रैंडम जांच में ही एक दर्जन से अधिक अस्पतालों में खामियां निकल के सामने आ गई। इससे विभागीय मॉनिटरिंग की जमीनी हकीकत उजागर भी खुलकर नजर आ गई। वहीं दूसरी ओर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब भी नोडल अधिकारी की जांच के दौरान अवैध अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों के संचालित होने की शिकायतें और मामले लगातार सामने आ रहे हैं।स्थानीय स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले सीएचसी और पीएचसी के अधीक्षकों की भूमिका भी चर्चा में है। कई मामलों में कार्रवाई का पूरा दारोमदार नोडल अधिकारी पर छोड़कर स्थानीय जिम्मेदार अपनी जवाबदेही से किनारा करते नजर आते हैं। इन परिस्थितियों के बीच जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने अब प्रशासनिक मोर्चा संभालते हुए तीन जांच टीमें गठित कर दी हैं। डीएम ने तीन टीमें गठित कर निजी अस्पतालों की आकस्मिक जांच कराने और अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्यवाही का निर्देश दिया है।

डीएम ने गठित की तीन प्रशासनिक टीमें –

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने चिन्हित एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। इन टीमों में एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को निजी अस्पताल पंजीकरण के नोडल अधिकारी के साथ शामिल किया गया है। गठित टीमें संबंधित अस्पतालों में अचानक पहुंचकर मौके की स्थिति का सत्यापन करेंगी। जिलाधिकारी ने जांच के दौरान मिलने वाली अनियमितताओं पर तत्काल नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

तीन महीने की जांच में महज एक दर्जन से अधिक अस्पताल चिन्हित –

जिले में अवैध और मानकविहीन अस्पतालों के संचालन की समस्या नई नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों के संचालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। नोडल अधिकारी की जांच में भी कई स्थानों पर ऐसे संस्थान संचालित मिलते रहे हैं, जिनके पंजीकरण और निर्धारित मानकों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसके बावजूद पिछले तीन महीनों में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान महज एक दर्जन से अधिक अस्पतालों को चिन्हित किया जाना विभागीय कार्यवाही की गति और व्यापकता पर सवाल खड़े करता है। जिले के भौगोलिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या को देखते हुए नियमित और व्यापक निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।

नोडल अधिकारी के भरोसे पूरी व्यवस्था, अधीक्षकों की जवाबदेही पर सवाल –

निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों की निगरानी केवल जिला स्तर के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हो सकती। संबंधित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करने वाले सीएचसी और पीएचसी अधीक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अवैध और मानकविहीन संस्थानों के संचालन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिखने से उनकी जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई मामलों में कार्यवाही का पूरा ठीकरा नोडल अधिकारी पर छोड़ दिया जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर नियमित निरीक्षण और अनियमितताओं की सूचना देने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों की है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के साथ स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही की समीक्षा भी जरूरी है।

रैंडम जांच में खुली विभागीय निगरानी की पोल –

बताते चलें कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के निजी अस्पतालों की रैंडम जांच कराई गई थी। इस दौरान कई अस्पतालों में पंजीकरण के समय दर्शाए गए एमबीबीएस चिकित्सक मौके पर मौजूद नहीं मिले। वहीं, कुछ अस्पतालों के पंजीकरण का नवीनीकरण भी नहीं पाया गया। अस्पतालों के संचालन से जुड़े निर्धारित मानकों के अनुपालन में भी कमियां सामने आईं। प्रारंभिक जांच में मिली इन अनियमितताओं के बाद जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। अब प्रशासनिक स्तर पर जांच कराकर इन कमियों का सत्यापन कराने की तैयारी है।

जांच के बाद बड़े एक्शन की उम्मीद –

जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीनों टीमें निजी अस्पतालों के पंजीकरण, नवीनीकरण, पंजीकृत चिकित्सकों की उपलब्धता और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालन की पड़ताल करेंगी। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाली आकस्मिक जांच से अस्पतालों की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी साथ ही जिले में निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर सख्ती देखने को मिल सकती है।

 

 

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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