आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• 17 सितंबर को कालाहांडी से शुरू की थी अयोध्या धाम की पदयात्रा
• रोजाना तय कर रहे 25 से 30 किलोमीटर का सफर
• बभनी के श्रीहरि शंकर मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद फिर शुरू की यात्रा
• करीब एक हजार किलोमीटर पैदल चलकर करेंगे रामलला के दर्शन
सोनभद्र । मन में अटूट आस्था और जुबां पर प्रभु श्रीराम का नाम हो तो मुश्किल रास्ते और मौसम की चुनौतियां भी हौसले को डिगा नहीं पातीं। कुछ ऐसा ही संकल्प लेकर ओडिशा के कालाहांडी जिले से अयोध्या धाम के लिए निकले सात रामभक्त करीब 650 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर शनिवार की रात सोनभद्र के बभनी पहुंचे। रविवार की सुबह असनहर स्थित श्रीहरि शंकर मंदिर में दर्शन-पूजन और रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालुओं का दल एक बार फिर अयोध्या धाम की ओर रवाना हो गया। इन श्रद्धालुओं का लक्ष्य करीब एक हजार किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर प्रभु श्रीराम के दर्शन करना है।
जानकारी के अनुसार, ओडिशा के कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ थाना क्षेत्र स्थित बड़गुमर गांव से सात श्रद्धालुओं का यह दल 17 सितंबर को अयोध्या धाम के लिए रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान दल भवानीपटना, जूनागढ़, बलांगीर, पदमपुर, कोरबा, सरगुजा और बलरामपुर होते हुए बभनी पहुंचा। लगातार पैदल चलकर करीब 650 किलोमीटर का सफर पूरा कर चुके इन रामभक्तों के कदम अब भी अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। खराब मौसम के चलते रास्ते में कुछ स्थानों पर उन्हें एक-दो दिन रुकना भी पड़ा, लेकिन उनकी आस्था और संकल्प में कोई कमी नहीं आई।
रोजाना 25 से 30 किलोमीटर पैदल तय करते हैं सफर –
दल के प्रमुख नाथ गोपाल ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की जा रही है। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हुए दल आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य अयोध्या पहुंचकर भगवान श्रीराम के दर्शन करना और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करना है।
नाथ गोपाल के मुताबिक, पैदल तीर्थयात्रा महज एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग है। प्राकृतिक वातावरण में चलते हुए ईश्वर का स्मरण और चिंतन करने से मन को शांति मिलती है। इससे शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित होने के साथ ही श्रद्धा और आस्था भी मजबूत होती है।
सात श्रद्धालुओं का दल, मंजिल अयोध्या धाम –
इस पदयात्रा में नाथ गोपाल के साथ महेंद्र गोपाल, चम्पे सरोवर, दुर्जोधन गोपाल, निराकार मांझी, सुशील गोपाल और टुन्नु गोपाल शामिल हैं। सातों श्रद्धालु कठिन रास्तों, लंबी दूरी और मौसम की चुनौतियों को पार करते हुए प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या की ओर बढ़ रहे हैं। बभनी में उनके पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद उनकी अनूठी रामभक्ति क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





