लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में डिजिटल अरेस्ट और अन्य गंभीर साइबर अपराधों को अंजाम देने वाले एक बड़े अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर क्राइम टीम ने शनिवार को शहर के चार अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर छह अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स और भारी मात्रा में अन्य हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, हालांकि इस कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह द्वारा इंटरनेट आधारित कॉलिंग के जरिए देश और विदेश से साइबर ठगी के काले कारोबार को संचालित किया जा रहा था। एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने इस खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि अवैध सिम बॉक्स के संचालन की पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया था। दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों से मिली जानकारियों के आधार पर हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन वाले संदिग्ध ठिकानों को चिह्नित किया गया, जिसके बाद पुलिस की संयुक्त टीमों ने सुशांत गोल्फ सिटी के स्वाति अपार्टमेंट, पारा के आदर्श विहार स्थित आशीर्वाद बिल्डिंग, बीबीडी के गोल्ड लाइन अपार्टमेंट और चिनहट के आदर्श नगर स्थित जीजे पैराडाइज में एक साथ छापेमारी की।
इन सभी ठिकानों से पुलिस ने छह अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स के साथ-साथ तीन वीपीएन गेटवे, 21 स्मार्ट स्विच, तीन स्मार्ट हब, चार इन्वर्टर व यूपीएस, 18 बैटरियां, एक लॉक टैबलेट, वाई-फाई और नेटवर्क राउटर तथा निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे सहित तमाम आधुनिक उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस ने बताया कि इन 32-पोर्ट सिम बॉक्स में एक साथ दर्जनों सिम कार्ड लगाकर इंटरनेट आधारित कॉलिंग को विभिन्न स्थानीय मोबाइल नेटवर्क के जरिए संचालित किया जाता है, जिससे कॉलिंग का वास्तविक स्रोत और करने वाले की लोकेशन पूरी तरह छिप जाती है। इस तकनीक का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी विदेश में बैठकर भी देश के नागरिकों को भारतीय मोबाइल नंबरों से फोन करते हैं, और डिजिटल अरेस्ट के मामलों में खुद को सीबीआई, पुलिस या अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं तथा उनकी गाढ़ी कमाई ठग लेते हैं। एसीपी साइबर क्राइम शाहिदा परवीन ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि जिन चार स्थानों से ये उपकरण बरामद हुए हैं, उन्हें सौगात अस्थान नामक शातिर जालसाज ने किराए पर ले रखा था और वही पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोपी इन कमरों में पूरा सिस्टम लगाने के बाद सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी भी रखता था। उसका नाम हाल ही में वाराणसी में पकड़े गए साइबर जालसाजों से पूछताछ के दौरान प्रकाश में आया था, और पुलिस अब उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस को जांच के दौरान आरोपी के दो अलग-अलग पतों वाले पहचान पत्र भी मिले हैं, जिनमें एक पर कानपुर और दूसरे पर सुशांत गोल्फ सिटी का पता दर्ज है। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि हाल के दिनों में लखनऊ में हुई डिजिटल अरेस्ट की वारदातों में इसी बरामद नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था, और पुलिस अब बरामद सभी डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक व तकनीकी जांच करवाते हुए इस रैकेट से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।
Author: AJEET KUMAR SINGH
अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"





