धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले खरीदारी के लिए एक बेहद दुर्लभ और अत्यंत शुभ महामुहूर्त आ गया है। आगामी 1 नवंबर को पड़ने वाला ‘रवि पुष्य नक्षत्र’ का यह विशेष योग ज्योतिषीय दृष्टि से अक्षय तृतीया जितना ही खास और फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह अबूझ मुहूर्त खरीदारी के लिए सर्वोत्कृष्ट है, जिसमें की गई खरीदारी घर-परिवार में लंबे समय तक के लिए सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आती है। रवि पुष्य नक्षत्र का यह पवित्र योग 1 नवंबर की सुबह 10:37 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 2 नवंबर की सुबह 09:04 बजे तक रहेगा। इस दौरान जो लोग विवाह समारोह की खरीदारी, नए वस्त्र, आभूषण या अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय बेहद उत्तम रहेगा।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रख्यात ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा के मुताबिक, रवि पुष्य नक्षत्र एक अबूझ मुहूर्त है, जिसकी तुलना अक्षय तृतीया और भटली नवमी जैसे स्वयंसिद्ध मुहूर्तों से की जाती है। इस विशेष दिन पर सोना, चांदी, भवन, भूमि, भूखंड और वाहन की खरीदारी करना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि रवि पुष्य के इस पवित्र काल में स्थायी संपत्ति या वस्तुएं खरीदने से जीवन में अटूट समृद्धि और बरकत बनी रहती है। वहीं, बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र के दौरान घर की साज-सज्जा का सामान और नए वस्त्र खरीदना अत्यंत लाभकारी है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और कार्यों में स्थायित्व आता है। हालांकि, आभूषण विशेष रूप से खरीदने के लिए 4 नवंबर का मुहूर्त तय किया गया है, जबकि आगामी 6 नवंबर को धनतेरस के पावन पर्व पर सोना, चांदी और पीतल के बर्तन आदि खरीदने का श्रेष्ठ योग रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का कहना है कि मानव जीवन में शरद ऋतु और हेमंत यानी ठंड के इस मौसम को भौतिक वस्तुओं की खरीदारी के लिए सबसे उत्तम काल माना गया है, जो दीपावली से लेकर देव दीपावली तक प्रभावी रहता है। ज्योतिष में किसी भी वस्तु की खरीदारी के लिए तिथि, वार, नक्षत्र और योग के आधार पर शुभ काल तय करने का बड़ा महत्व है। जिस प्रकार धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त का होना आवश्यक माना जाता है, उसी प्रकार भौतिक सुख-सुविधाओं की वस्तुओं को यदि शुभ मुहूर्त में खरीदा जाए, तो उनका स्थायित्व और शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है, जबकि अशुभ काल में की गई खरीदारी कई बार नुकसानदेह साबित हो सकती है। आगामी रवि पुष्य योग के दौरान 1 नवंबर को सुबह 06:33 से 2 नवंबर की सुबह 04:30 बजे तक ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’, दिन में 11:42 से 12:27 बजे तक ‘अभिजीत मुहूर्त’ और शाम 05:36 से 06:02 बजे तक ‘गोपनीय/गोधूलि मुहूर्त’ भी प्रभावी रहेगा। विशेष ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस नक्षत्र पर देवगुरु बृहस्पति, न्याय के देवता शनि और मन के कारक चंद्रमा का विशेष प्रभाव रहता है, जिससे यह काल और भी अधिक कल्याणकारी बन जाता है।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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