आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । शासन स्तर से जारी आदेशों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने से नाराज बीसी सखियों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मियों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में उनके हित में कई शासनादेश जारी किए गए, लेकिन उनका लाभ अब तक धरातल पर नहीं मिल सका है। पंचायत भवन में बैठने की व्यवस्था, पहचान पत्र जारी करने, नए बैंकों से जोड़ने, बकाया मानदेय का भुगतान और कामकाज के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने जैसी मांगों को लेकर उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। चेतावनी दी है कि यदि अगले एक महीने में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जनपद के सभी बीसी सखियाँ जिला मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
पंचायत भवन में बैठने और पहचान पत्र देने की मांग –
बीसी सखियों ने सीडीओ को नामित ज्ञापन में कहा कि शासनादेश के अनुसार सभी कर्मियों के लिए ग्राम पंचायत स्थित पंचायत भवन में बैठने की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे उन्हें पंचायत स्तर पर अपने कार्यों के निष्पादन में सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही उन्होंने आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने की मांग की है, ताकि बैंकिंग कार्यों के दौरान उनकी पहचान स्थापित हो सके और उन्हें कामकाज में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
नए बैंकों से जोड़ने और काम शुरू कराने पर जोर –
सखियों ने नए राष्ट्रीयकृत बैंकों को जोड़ने संबंधी शासनादेश को तत्काल लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें संबंधित बैंकों से जोड़कर आवश्यक पहचान पत्र और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी, तब तक वे अपना कार्य सुचारु रूप से शुरू नहीं कर सकेंगे। उन्होंने शासनादेशों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर लागू कराने की मांग की है।
छह महीने के मानदेय में भी भुगतान का इंतजार –
बीसी सखियों ने मानदेय भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि शासन की ओर से छह महीने तक प्रतिमाह चार हजार रुपये मानदेय देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई कर्मियों को इसका पूरा भुगतान नहीं मिला है। किसी को दो महीने तो किसी को चार महीने का ही मानदेय प्राप्त हुआ है। उन्होंने बकाया मानदेय की राशि तत्काल खातों में भेजने की मांग की है, ताकि आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सके।
मनरेगा भुगतान का काम बीसी संविदाओं से कराने की मांग –
बीसी सखियों ने शासनादेश के अनुसार पंचायत स्तर पर मनरेगा भुगतान का कार्य भी बीसी संविदाओं से कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित आदेश को प्रभावी ढंग से लागू कर उन्हें निर्धारित कार्य सौंपा जाना चाहिए, जिससे वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें और नियमित रूप से आजीविका चला सकें।
खराब उपकरणों के कारण कामकाज प्रभावित होने का आरोप
बीसी संविदा कर्मियों ने बैंकों की ओर से उपलब्ध कराए गए उपकरणों के खराब होने और तकनीकी सहयोग नहीं मिलने की समस्या भी उठाई है। उनका आरोप है कि उपकरण खराब होने के कारण वे पिछले कई वर्षों से सुचारु रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में नई बैंकिंग व्यवस्था के तहत काम शुरू करने के लिए उन्हें नए उपकरण उपलब्ध कराने और उनके संचालन व रखरखाव की समुचित व्यवस्था करने की मांग की गई है। कर्मियों के मुताबिक, नए बैंकों से जुड़ने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध होना भी जरूरी है।
एक महीने का अल्टीमेटम, फिर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन –
बीसी सखियों ने प्रशासन से सभी समस्याओं का अविलंब समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शासनादेशों का वास्तविक लाभ मिलने से वे स्वतंत्रतापूर्वक अपने कार्यों का संचालन कर सकेंगे और अपनी आजीविका चला पाएंगे। कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो जनपद के सभी बीसी सखी मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....






