आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । गांव की सरकार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें शिक्षा, रोजगार तथा स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सोनभद्र में पहल शुरू की गई है। पंचायती राज मंत्रालय की आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत पहल के तहत जिले की दो ग्राम पंचायतों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए चतरा ब्लॉक की धरमदासपुर और करमा ब्लॉक की बहेरा ग्राम पंचायत का चयन किया गया है। इन पंचायतों में महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं, बालिका शिक्षा और महिला सुरक्षा से जुड़े मानकों पर काम किया जाएगा। जिले की 621 ग्राम पंचायतों में से फिलहाल दो पंचायतों का चयन होने के बाद अब इन्हें महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनाने की तैयारी है।
पंचायत की बैठकों से लेकर फैसलों तक बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी –
आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने के लिए चयनित गांवों में महिलाओं की पंचायत बैठकों में नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। महिलाओं और बालिकाओं को पंचायत स्तर पर होने वाली चर्चाओं और निर्णय प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास होंगे, ताकि वे अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक होने के साथ गांव के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकें, इसके साथ ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं से जुड़े कानूनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य महिला अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और योजनाओं के क्रियान्वयन में महिलाओं की जरूरतों को प्राथमिकता देना है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा पर रहेगा जोर –
महिला हितैषी पंचायत के मानकों में स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रमुख स्थान दिया गया है। चयनित ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और गर्भवती महिलाओं तक सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को अधिकतम लाभ दिलाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
वहीं बालिकाओं की प्राथमिक से उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई जारी रखने तथा स्कूल छोड़ने की दर को न्यूनतम करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। महिलाओं के शैक्षिक स्तर में सुधार और बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने को भी इस पहल का अहम हिस्सा बनाया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा –
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए गांवों में स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय करने और उन्हें बैंक ऋण से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। महिलाओं को बकरी पालन, मुर्गी पालन सहित अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इसके अलावा महिला अपराधों में कमी लाने और सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पंचायत स्तर पर महिला हेल्प डेस्क, सीसीटीवी कैमरे और महिला सुरक्षा से जुड़े अन्य उपायों को विकसित करने पर काम किया जाएगा।
621 ग्राम पंचायतों में दो का चयन, मॉडल बनाने की तैयारी –
जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण ने बताया कि “पंचायती राज मंत्रालय की इस पहल के तहत चतरा ब्लॉक की धरमदासपुर और करमा ब्लॉक की बहेरा ग्राम पंचायत का चयन आदर्श महिला हितैषी पंचायत के रूप में किया गया है। इन गांवों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, महिला संबंधी कानूनों के प्रति जागरूकता विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र की इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक जिले में कम से कम एक आदर्श महिला हितैषी ग्राम पंचायत विकसित करना है। इसके तहत बालिकाओं की शिक्षा, संस्थागत प्रसव, पंचायत बैठकों में महिलाओं की सहभागिता, स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और महिला अपराध जैसे संकेतकों के आधार पर पंचायतों का आकलन किया जाएगा। जिले की चयनित पंचायतों को इन मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि वे अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी उदाहरण बन सकें।”






