आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों ने अब अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कलमबंद कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। कोरोना महामारी के कठिन दौर में घर-घर पहुंचकर संक्रमितों की निगरानी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अभियानों तक में अहम भूमिका निभाने वाली यही आशा बहुएं आज अपनी लंबित मांगों के निस्तारण के लिए आंदोलन की राह पर हैं। बुधवार को कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित चार सूत्रीय ज्ञापन सीएमओ को सौंपते हुए साफ किया कि मांगों पर शासन और विभाग की ओर से सकारात्मक कार्यवाही होने तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
ऑल इंडिया आशा बहु कार्यकर्ती कल्याण सेवा समिति की जिलाध्यक्ष मंजू मौर्या ने बताया कि “7 अक्टूबर से ही अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी गई है। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने किसी भी तरह का सरकारी कार्य नहीं करने का निर्णय लिया है। सरकारी दस्तावेजों से जुड़े कार्यों के साथ विभिन्न पोर्टल पर किए जाने वाले कार्यों का भी बहिष्कार किया जाएगा।”
लंबे समय से मांगें लंबित, अब आर-पार की राह –
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराती रही हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें कार्य बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर शासन और विभाग की ओर से ठोस एवं सकारात्मक पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। गुरुवार दोपहर कार्यकर्ताओं ने सीएमओ को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।
काम के वक्त याद, हक की बात पर अनदेखी –
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों को गांव-गांव तक पहुंचाने में उनसे लगातार जिम्मेदारियां ली जाती हैं। सरकारी सर्वे से लेकर पोर्टल और दस्तावेजी कार्यों तक उनका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन पारिश्रमिक और सम्मान की बात आने पर उनकी समस्याएं लंबे समय तक लंबित रह जाती हैं। कार्यकर्ताओं की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जिस व्यवस्था में उन्हें जरूरत के समय लगातार जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, क्या उसी व्यवस्था में उनके श्रम, समय और समस्याओं का उचित मूल्यांकन नहीं होना चाहिए? उनका आरोप है कि उन्हें न तो कभी उचित मानदेय मिला और न ही हमेशा अपेक्षित सम्मानजनक व्यवहार। उनका कहना है कि उन्हें कई बार ऐसी व्यवस्था का हिस्सा महसूस कराया गया, जिसमें जरूरत पड़ने पर काम लिया जाता है और मांगों के समय उनकी आवाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इस दौरान रेखा, प्रीति, नेहा कुशवाहा, सुनीता, लक्ष्मी, बिंदु, रेखा देवी, शांति, अनुराधा, पुष्पा, सविता मिश्रा, विमला, मनोरमा, किरण, नेहा, विभा मिश्रा और सुशीला समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहीं।






