आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। गांवों में विकास की नई मिसाल कायम करने वाली ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई मुख्यमंत्री विशेष पुरस्कार योजना को लेकर जिले की ग्राम पंचायतों में अपेक्षित उत्साह नजर नहीं आया। जिले की कुल 621 ग्राम पंचायतों में महज 130 पंचायतों ने ही पुरस्कार के लिए आवेदन किया है। प्राप्त आवेदनों के आधार पर फिलहाल 34 ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इन पंचायतों के दावों और कार्यों के सत्यापन के लिए 10 टीमें गठित कर दी गई हैं। योजना के तहत चयनित प्रत्येक ग्राम पंचायत को 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जानी है।
15 सितंबर से मांगे गए थे आवेदन –
प्रदेश में पहली बार शुरू की गई इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों से 15 सितंबर से आवेदन मांगे गए थे और 30 सितंबर आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। शासन की ओर से पंचायतों के बेहतर कार्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना में निर्धारित मानकों के आधार पर पंचायतों का मूल्यांकन किया जाएगा। जिले से प्राप्त आवेदनों में से पात्र ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजे जाएंगे। इसके बाद शासन स्तर से निर्धारित मानकों और पंचायतों के प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।
विकास के साथ स्वच्छता और पर्यावरण भी चयन का आधार –
मुख्यमंत्री विशेष पुरस्कार योजना में ग्राम पंचायतों के केवल निर्माण कार्यों को ही आधार नहीं बनाया गया है, बल्कि गांव में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और पंचायत के समग्र प्रदर्शन को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है। इसके तहत घर-घर कूड़ा संग्रहण, पंचायत की आय बढ़ाने के प्रयास, कॉमन सर्विस सेंटर एवं आधार केंद्र के माध्यम से नागरिक सेवाओं की उपलब्धता, तरल अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त गांव और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को प्रमुख आधार बनाया गया है।
इसके अलावा ‘मेरा तालाब मेरी योजना’, महिला नेतृत्व और सर्वाधिक जैविक कृषि करने वाली ग्राम पंचायतों को भी पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों में शामिल किया गया है। ऐसे में पंचायतों के लिए यह पुरस्कार केवल आर्थिक प्रोत्साहन ही नहीं, बल्कि गांव में किए गए उल्लेखनीय और नवाचार आधारित कार्यों को पहचान दिलाने का भी अवसर है।
पांच पंचायतों को मिलेगा 50-50 लाख का पुरस्कार –
जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण ने बताया कि “योजना के तहत जिले की कुल ग्राम पंचायतों की करीब 10 प्रतिशत पंचायतों को ही आवेदन करना था। जिले से प्राप्त आवेदनों के आधार पर निर्धारित मानकों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। सत्यापन के बाद पात्र पंचायतों के प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से निर्धारित मानकों के आधार पर पंचायतों का अंतिम चयन होगा।”





