आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बावजूद जिले में कथित अवैध अस्पतालों के संचालन पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। इसका ताजा उदाहरण चोपन में उस वक्त देखने को मिला जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महीनों से किराये के मकान में संचालित एक कथित अवैध अस्पताल पर छापेमारी कर उसे सील कर दिया। कार्यवाही के दौरान अस्पताल में तीन मरीज भर्ती मिले, जिन्हें 102 नंबर एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन भेज दिया गया। वहीं अस्पताल की संचालिका कार्रवाई की भनक लगते ही मौके से फरार हो गई।
निजी हॉस्पिटल पंजीयन के नोडल अधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 गुलाब शंकर यादव ने बताया कि चोपन बैरियर स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर के पास किराये के मकान में पिछले कई महीनों से बिना नाम का एक कथित अवैध क्लिनिक संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों में वहां बड़े पैमाने पर डीएनसी किए जाने की बात भी सामने आ रही थी।
डॉ0 गुलाब शंकर यादव के मुताबिक, शिकायतों के आधार पर पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा कई बार छापेमारी की गई, लेकिन हर बार मौके पर मकान बंद मिला। इससे कार्यवाही नहीं हो पा रही थी। उन्होंने बताया कि गुरुवार को टीम ने दोबारा छापेमारी की तो इस बार उक्त केंद्र खुला मिला और वहां तीन मरीज भर्ती पाए गए।
नोडल अधिकारी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती तीनों मरीजों को तत्काल 102 नंबर एंबुलेंस की सहायता से सीएचसी चोपन शिफ्ट कराया गया। इसके बाद चोपन थाना पुलिस की मौजूदगी में कथित अवैध अस्पताल को सील कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कार्यवाही के दौरान अस्पताल की संचालिका मौके से फरार हो गई, जिसके संबंध में आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।
हर बार बंद मिला मकान, खुला तो मिलीं मरीजों की मौजूदगी –
चोपन में हुई इस कार्यवाही ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग को यदि कई महीनों से कथित अवैध क्लिनिक के संचालन और वहां डीएनसी किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं और पूर्व में कई बार टीम मौके पर पहुंच चुकी थी, तो आखिर कार्यवाही के दौरान हर बार मकान बंद कैसे मिल जाता था? इस बार अस्पताल खुला मिलने और तीन मरीजों के भर्ती पाए जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
सख्ती के दावों के बीच अवैध अस्पतालों का कारोबार चुनौती –
जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अवैध अस्पतालों एवं बिना पंजीयन चिकित्सा गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्यवाही की बात कही जा रही है। इसके बावजूद जिले में इस तरह के मामले सामने आना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। चोपन की कार्यवाही यह सवाल भी छोड़ गई है कि यदि एक कथित अवैध अस्पताल महीनों तक संचालित होता रहा, तो जिले के अन्य हिस्सों में ऐसे कितने केंद्र अभी भी विभाग की निगरानी से बाहर हो सकते हैं।





