आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सीएमओ कार्यालय कार्यक्रम आयोजित
• सीएमओ बोले- इलाज के साथ पोषण भी बेहद जरूरी
सोनभद्र । राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मुख्य चिकित्साधिकारी सभागार में 65 क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई। पोषण पोटली का वितरण मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर की कुलपति प्रो0 शोभा गौड़ एवं रजिस्ट्रार राम नारायण सिंह के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ चिकित्सकों और अन्य गणमान्य लोगों ने क्षय रोगियों को बीमारी से बचाव, नियमित दवा सेवन और संतुलित पोषण के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश मिश्रा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 प्रेम नाथ, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद, संत कीनाराम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 गोपाल सिंह सहित क्षय रोग विभाग के कर्मचारी एवं अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विमल कुमार सिंह ने किया।
दवा के साथ पोषण पर भी दें विशेष ध्यान –
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश मिश्रा ने कहा कि “क्षय रोग का उपचार पूरी तरह संभव है, बशर्ते मरीज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा का सेवन करे और उपचार बीच में न छोड़े। उन्होंने कहा कि टीबी से लड़ाई में दवा के साथ पौष्टिक आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। पोषण पोटली का उद्देश्य मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक पोषण उपलब्ध कराना और उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर जांच में देरी न करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निःशुल्क जांच एवं उपचार का लाभ उठाएं।”
नियमित दवा सेवन से टीबी को दी जा सकती है मात –
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 प्रेमनाथ ने क्षय रोगियों को बीमारी से बचाव और नियमित दवा सेवन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीबी का इलाज लंबी अवधि का हो सकता है, इसलिए मरीजों को बीच में दवा बंद नहीं करनी चाहिए। नियमित उपचार के साथ चिकित्सकों की सलाह का पालन करने पर मरीज इस बीमारी से पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने कहा कि “टीबी के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार जागरूकता और जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खांसी रहने वाले लोगों को इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार शुरू होने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। उन्होंने टीबी मरीजों से उपचार की पूरी अवधि तक नियमित दवा लेने तथा पोषण पर विशेष ध्यान देने की अपील की।”
पोषण के लिए महंगे खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं –
मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर के रजिस्ट्रार राम नारायण सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ राज्यपाल की प्रेरणा से चल रहे टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य समाज के सहयोग से क्षय रोग को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को उपचार के साथ पर्याप्त पोषण मिलना जरूरी है और इसी उद्देश्य से पोषण पोटली का वितरण किया जा रहा है।
संत कीनाराम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 गोपाल सिंह ने कहा कि पोषण के लिए हमेशा महंगे खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। घर में आसानी से उपलब्ध आंवला, गुड़, भुना चना, सत्तू और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ भी शरीर को आवश्यक पोषण देने में मददगार हो सकते हैं। उन्होंने मरीजों एवं उनके परिजनों को संतुलित और पौष्टिक आहार लेने के प्रति जागरूक किया।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज –
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने बताया कि “तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी, खांसी में बलगम या खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, रात में पसीना आना, बुखार या ठंड लगना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की जांच और उपचार की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।”






