आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । सदर तहसील रॉबर्ट्सगंज में उपजिलाधिकारी आशीष कुमार त्रिपाठी की कार्यप्रणाली को लेकर लेखपालों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। लेखपाल संघ के आह्वान पर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। लेखपालों ने पूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए एसडीएम के तबादले की मांग पर अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
लेखपालों का आरोप है कि सदर एसडीएम द्वारा उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया जा रहा है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसी से क्षुब्ध होकर सोमवार देर शाम लेखपालों ने कलमबंद हड़ताल शुरू कर तहसील परिसर में धरना शुरू कर दिया था। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लेखपाल धरने पर डटे रहे।
रामचन्द्र लेखपाल पर कार्यवाही को लेकर भड़का आक्रोश –
लेखपाल संघ का कहना है कि धारा 24, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत पत्थरगढ़ी और फील्डबुक जमा न करने के मामले में लेखपाल रामचन्द्र के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की गई है। संघ का आरोप है कि रामचन्द्र की डीपीसी प्रक्रिया चल रही है और जांच अधिकारी की ओर से जांच आख्या भी दी जा चुकी है, इसके बावजूद विभागीय कार्रवाई समाप्त नहीं की जा रही है।
लेखपालों ने दावा किया कि इस मामले को लेकर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया। संघ का कहना है कि न इसी प्रकरण के बाद सभी लेखपालों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है।
किसी के दबाव में नहीं करेंगे काम, सम्मान के साथ चाहिए ड्यूटी – संजय सिंह
लेखपाल संघ के सदर तहसील अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि “लेखपाल राजस्व विभाग की जमीनी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके साथ यदि लगातार दबाव, दुर्व्यवहार या मानसिक प्रताड़ना का माहौल बनाया जाएगा तो कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि संघ अपने साथी लेखपाल के साथ खड़ा है और जब तक समस्या का उचित समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। संजय सिंह ने बताया कि लेखपाल किसी अधिकारी के व्यक्तिगत विरोध में नहीं, बल्कि सम्मानजनक कार्य वातावरण और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने एसडीएम के तबादले की मांग को भी दोहराया।”
बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन और होगा तेज – साजिद खान
तहसील मंत्री साजिद खान ने कहा कि “लेखपालों ने हमेशा प्रशासनिक कार्यों में सहयोग किया है, लेकिन यदि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा तो आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ किसी भी लेखपाल के साथ अन्याय स्वीकार नहीं करेगा। साजिद खान के मुताबिक, अधिकारियों से बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता खुलना चाहिए, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो लेखपाल संघ आगे की रणनीति तय करेगा।*
कार्य बहिष्कार से बढ़ सकती है आम लोगों की परेशानी –
लेखपालों के सामूहिक कार्य बहिष्कार का असर राजस्व संबंधी कार्यों पर पड़ने की आशंका है। आय, जाति, निवास, वरासत, भूमि संबंधी रिपोर्ट सहित कई महत्वपूर्ण राजस्व कार्य लेखपालों से जुड़े होते हैं। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
धरने पर अभिनव, शैलेन्द्र, मनीष, रामचन्द्र, पंकज, मुकेश, सुधीर, अभिषेक, रत्नेश, संजीव श्रीवास्तव सहित तहसील के अन्य लेखपाल मौजूद रहे।






