आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद पुराने पेंशनरों के हितों को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच गुरुवार को उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था ने अपनी आवाज बुलंद की। संस्था के बैनर तले जिलाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा के नेतृत्व में पेंशनरों ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। पेंशनरों ने कहा कि सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस दौरान जिलाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि “आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को लेकर पेंशनरों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण को आयोग के विचारणीय बिंदुओं में शामिल नहीं किया गया है। इससे देशभर के पुराने पेंशनरों में असमंजस और आशंका पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा राज्यसभा में यह आश्वासन दिया गया था कि सातवें वेतन आयोग में पेंशनरों को मिले लाभ आठवें वेतन आयोग में भी जारी रहेंगे और इस संबंध में आवश्यक कार्यालय ज्ञापन जारी किया जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा ज्ञापन जारी नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद कर्मचारी को मिलने वाला सामाजिक एवं आर्थिक अधिकार है। डीएस नाकरा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा पेंशन को सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर की गई व्याख्या का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति की अलग-अलग तारीख के आधार पर पेंशनरों के बीच ऐसा अंतर नहीं किया जाना चाहिए, जिससे पुराने पेंशनर महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच कमजोर पड़ जाएं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का प्रभाव प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से राज्यों के कर्मचारियों और पेंशनरों पर भी पड़ता है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग में पुराने पेंशनरों के हितों की अनदेखी का असर उत्तर प्रदेश के पेंशनरों पर भी पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पेंशनरों की आशंकाओं को तत्काल दूर करते हुए स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए।”
संस्था के मंत्री इं0 ए0एन0सिंह ने कहा कि “पेंशनरों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने में लगाया है। अब सेवानिवृत्ति के बाद उनके सम्मानजनक जीवन की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग में पुराने पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए। सातवें वेतन आयोग की तर्ज पर सभी पेंशनरों को समान रूप से लाभ दिए जाने का प्रावधान किया जाए, ताकि किसी वर्ग में उपेक्षा की भावना पैदा न हो।
उन्होंने कोरोना काल में रोके गए 18 माह के महंगाई भत्ते/महंगाई राहत के बकाये का भुगतान करने, पेंशन राशिकरण की कटौती अवधि 15 वर्ष से घटाकर अधिकतम 11 वर्ष करने तथा वरिष्ठ पेंशनरों को कम उम्र से अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई।”
पेंशनर्स ने माँग करते हुए कहा कि “पेंशन देनदारियों से संबंधित संसद से पारित विधेयक वापस लिया जाए। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग में 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों के पेंशन पुनरीक्षण को शामिल किया जाए। सातवें वेतन ए आयोग की तरह पुराने पेंशनरों को आठवें वेतन आयोग के सभी लाभ दिए जाने संबंधी शासनादेश जारी है। इसके अलावा कोरोना काल से पूर्व वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनरों को रेल और हवाई यात्रा में मिलने वाली छूट बहाल करने, 18 माह के रोके गए महंगाई भत्ते/महंगाई राहत के अवशेष का भुगतान करने तथा पेंशन राशिकरण की कटौती अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष करने की मांग की गई। पेंशनरों ने 80 वर्ष की आयु पूरी होने पर मिलने वाली 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन की व्यवस्था में बदलाव करते हुए 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पर क्रमशः 5, 10 और 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की मांग भी रखी।”
इस दौरान माता प्रसाद, परमानन्द मिश्रा, रामविलास, कन्हैया लाल चौरसिया, के0राम, सुरेश कुमार, राजेंद्र कुमार, नन्द कुमार शर्मा, शिवनाथ शर्मा, राजनारायण, प्रेम कुमार, दामोदर सिंह, देवनारायण सिंह, मोतीलाल सिंह, रामदुलारे सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स मौजूद रहे।






