रॉबर्ट्सगंज (सोनभद्र)। मानसून की झमाझम बारिश शुरू होते ही जनपद सोनभद्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली निगम की एक बेहद आत्मघाती और लापरवाह तस्वीर सामने आ रही है। जिले के तमाम मुख्य बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों और वीआईपी चौराहों पर खुले में रखे गए हाई-वोल्टेज विद्युत ट्रांसफार्मर इस समय आम जनता के लिए साक्षात ‘यमराज’ साबित हो रहे हैं। बिजली निगम द्वारा सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बरती जा रही इस घोर लापरवाही के कारण कभी भी कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा घटित हो सकता है। अकेले रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र में करीब 32 प्रमुख स्थानों पर भारी क्षमता के ट्रांसफार्मर संचालित हो रहे हैं, जिनमें से एक तिहाई यानी लगभग 8 से 10 अति-संवेदनशील जगहों पर या तो सुरक्षा के लिए लगाई जाने वाली लोहे की जाली ही नदारद है, अथवा जो पहले से लगी थी वह पूरी तरह सड़-गल कर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि कई ट्रांसफार्मर तो व्यस्त सड़कों के किनारे, परिषदीय विद्यालयों के मुख्य द्वारों और घनी आबादी के बीच जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं, जिससे जलभराव के दिनों में इनमें करंट उतरने और मासूमों की जान जाने का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है।
स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार लिखित और मौखिक रूप से इन ट्रांसफार्मरों के चारों तरफ मजबूत सुरक्षा घेरा बनाने और उनका चबूतरा ऊंचा करने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए निगम के आला अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। यदि जमीनी हकीकत पर नजर डालें, तो रॉबर्ट्सगंज नगर के अखाड़ा मोहाल स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के गेट के ठीक बगल में लगा भारी क्षमता का ट्रांसफार्मर पूरी तरह खुला पड़ा है। स्कूल आने-जाने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय अभिभावकों की सांसें हमेशा हलक में अटकी रहती हैं। वहां रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र विजय और पंकज ने बताया कि बीते एक साल में इस ट्रांसफार्मर के केबल में शार्ट सर्किट से दो बार भयानक आग लग चुकी है और कम ऊंचाई पर हाईटेंशन तार लटक रहे हैं, लेकिन हादसों से कोई सबक नहीं लिया गया। स्थानीय निवासी अंगद पाल ने भी इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। यही भयावह स्थिति नई बस्ती (गांधीनगर) की है, जहां सड़क के बिल्कुल समानांतर जमीन पर ट्रांसफार्मर रख दिया गया है। बरसात होते ही इसके पास वाले खाली प्लॉट में घुटने तक पानी भर जाता है, जिससे पूरे मोहल्ले में करंट फैलने का डर बना रहता है। स्थानीय महिला ममता, सुषमा और नागरिक कैलाश सोनकर ने बताया कि सड़क निर्माण के समय चबूतरा ऊंचा करने की मांग की गई थी, मगर बिजली विभाग और नगर पालिका दोनों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
खतरे की यह घंटी यहीं नहीं रुकती, रॉबर्ट्सगंज के सबसे व्यस्त मेन चौक स्थित शीतला माता मंदिर के समीप तिराहे पर, घनी आबादी के बीच दो विशाल ट्रांसफार्मर बिना किसी सुरक्षा कवच के धू-धू कर जलते रहते हैं और उनसे लगातार चिंगारियां निकलती हैं। इसी खुले ट्रांसफार्मर के ठीक बगल में रोजाना मछली बाजार सजता है, जहां सैकड़ों की तादाद में खरीदार आते हैं और यही मार्ग संस्कृत पाठशाला मोहाल की घनी आबादी की लाइफलाइन है। इसी तरह छपका मोहाल स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय के ठीक पास भी बिना जाली का ट्रांसफार्मर छात्राओं की जान जोखिम में डाल रहा है, जबकि इसी मार्ग पर राजकीय पुस्तकालय और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर हैं। यही हाल ब्लॉक मुख्यालय के समीप बिच्छी पड़ाव, उरमौरा स्थित डायट परिसर के सामने, नवीन सब्जी मंडी गेट और बढ़ौली चौराहे के पास सिंचाई डाक बंगला मार्ग का है। उत्तर मोहाल के सत्यपाल जैन और बढ़ौली रोड के अमित सेठ जैसे प्रबुद्ध नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बरसात में करंट उतरने की घटनाएं आम हैं, इसलिए निगम को किसी की मौत का इंतजार किए बिना तत्काल मजबूत सुरक्षा जालियां और चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए।
पड़ोसी क्षेत्र रेणुसागर और अनपरा नगर पंचायत के औड़ी मोड़ स्थित नेहरू चौक पर पिछले वर्ष दुकानों के बीच लगे ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग से व्यापारियों की दुकानें खाक हो चुकी हैं, और मालवीय नगर में आरटीआई कॉलेज के सामने लगे ट्रांसफार्मर में करंट उतरने से छह महीने पहले दो बेकसूर गायों की तड़पकर मौत हो चुकी है, लेकिन अफसरशाही केवल कागजी कोरम पूरा करने में जुटी है। इस पूरे गंभीर और जानलेवा मामले पर जब हाइडिल उपकेंद्र के अवर अभियंता (जेई) धर्मेंद्र पटेल से बात की गई, तो उन्होंने घिसे-पिटे सरकारी ढर्रे पर जवाब देते हुए कहा कि कम्हारी मोहाल, मछली गली समेत जिन भी जगहों पर सुरक्षा घेरा नहीं है या क्षतिग्रस्त हो गया है, वहां नई सुरक्षा जाली लगाने का एक विस्तृत एस्टीमेट (प्रस्ताव) तैयार करके शासन को भेजा जा चुका है और जैसे ही वहां से बजट की स्वीकृति मिलेगी, युद्ध स्तर पर काम शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि, तब तक आम जनता को इसी मौत के साए के बीच रहने को मजबूर होना पड़ेगा।
Author: Harsh Vardhan
7 years experience in the field of journalism.





