आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जनपद में धीरे-धीरे गुलाबी ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है, जबकि दिन में तापमान अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ है। दिन और रात के तापमान में अंतर के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बदलते मौसम का असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बरतना और समय रहते जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
इसी क्रम में छपका स्थित गुड हेल्थ हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे एमबीबीएस (फिजिशियन) डॉ0 मनीष पटेल ने लोगों को बदलते मौसम में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। उन्होंने मौसम में बदलाव के दौरान खानपान, रहन-सहन और दैनिक दिनचर्या में सावधानी बरतने पर जोर दिया।
सुबह-शाम की ठंड से बचाव जरूरी –
मौसम में बदलाव के साथ सुबह और शाम के समय ठंड का एहसास बढ़ने लगता है। ऐसे में लोग अक्सर दिन के तापमान को देखते हुए हल्के कपड़ों में ही घर से बाहर निकल जाते हैं। सुबह जल्दी और देर शाम घर से बाहर रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम के अनुकूल कपड़े पहनना और शरीर को अचानक ठंड के संपर्क में आने से बचाना जरूरी है।
विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, पसीने से भीगे कपड़ों में अधिक देर तक रहने से बचना चाहिए। मौसम के अनुरूप दिनचर्या में बदलाव करने से मौसमी परेशानियों से बचाव में मदद मिल सकती है।
सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार को न करें नजरअंदाज –
बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, इन लक्षणों के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल मौसम में बदलाव का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर पर्याप्त आराम करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। यदि बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो या स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ती दिखाई दे तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में लक्षण दिखाई देने पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
खानपान और स्वच्छता पर दें विशेष ध्यान –
स्वस्थ रहने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन करना आवश्यक है। भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीने के साथ व्यक्तिगत स्वच्छता का भी ध्यान रखना चाहिए।
खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत अपनानी चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए। बीमार होने पर दूसरों के निकट संपर्क में आने से बचना और आवश्यकता के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना संक्रमण फैलने की आशंका कम करने में सहायक हो सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर रहें सतर्क –
बदलते मौसम में छोटे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को मौसम के अनुकूल कपड़े पहनाएं और उन्हें ठंड से बचाकर रखें। वहीं, बुजुर्गों तथा अस्थमा, हृदय रोग या अन्य दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी निर्धारित दवाएं नियमित रूप से लेते रहना चाहिए।
बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। घरेलू उपायों के भरोसे गंभीर लक्षणों को लंबे समय तक टालना भी नुकसानदेह हो सकता है।
सावधानी ही बेहतर बचाव –
डॉ0 मनीष पटेल ने बदलते मौसम के मद्देनजर लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। मौसम में बदलाव एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन लापरवाही के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद, व्यक्तिगत स्वच्छता और मौसम के अनुरूप रहन-सहन अपनाकर खुद को स्वस्थ रखने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
Author: Anand Kumar Chaubey
9 years experience in Journalism....





