Sonbhadra News : जिले में सजेंगे 494 दुर्गा पूजा पंडाल, एनओसी लेने में समितियाँ पीछे, फायर विभाग ने शुरू किया निरीक्षण

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । नवरात्र की शुरुआत के साथ ही जिले में दुर्गोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं भव्य पंडाल आकार ले रहे हैं तो कहीं उन्हें अंतिम रूप देने में आयोजन समितियां जुटी हैं। लेकिन इन तैयारियों के बीच अग्निसुरक्षा के मानकों को लेकर एक अहम सवाल खड़ा हो गया है। जिले में करीब 494 स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक महज 87 आयोजन समितियों ने ही अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। पिछले वर्ष एनओसी लेने वाली समितियों की संख्या 135 थी। ऐसे में इस बार सुरक्षा मानकों के प्रति समितियों की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
त्योहारी सीजन में आगजनी की घटनाओं की आशंका को देखते हुए अग्निशमन विभाग ने पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कराने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में रविवार को द्वितीय अग्निशमन सुरक्षा अधिकारी करन यादव के नेतृत्व में विभागीय टीम ने नगर क्षेत्र के पूजा पंडालों का निरीक्षण किया। इस दौरान आयोजन समितियों को अग्निसुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन करने और कमियों को समय रहते दूर करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका और बिजली विभाग के कर्मचारी भी सक्रिय नजर आए। कर्मचारियों ने पंडालों के आसपास बिजली के तारों की स्थिति का जायजा लिया और उन्हें दुरुस्त करने का काम किया, ताकि विद्युत संबंधी खामियों के कारण किसी तरह की अनहोनी न हो।

भदोही हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सख्ती –

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भदोही के औराई क्षेत्र में दुर्गा पूजा पंडाल में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हुआ था। इस घटना में कई लोगों की जान चली गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग झुलस गए थे। इस हादसे ने पूजा पंडालों में अग्निसुरक्षा की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद शासन स्तर से धार्मिक आयोजनों में आग से बचाव के मानकों का पालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया जाता रहा है।
इसी के मद्देनजर जिले में भी पूजा पंडालों के निर्माण के दौरान बिजली के तारों, ट्रांसफार्मरों और अन्य जोखिम वाले स्थानों से पर्याप्त दूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अग्निशमन विभाग की टीमों को पंडालों का निरीक्षण कर संभावित खतरों की पहचान करने और आयोजन समितियों से समय रहते कमियां दूर कराने को कहा गया है। वहीं, नगर पालिका और बिजली विभाग के कर्मचारियों की ओर से बिजली के तारों को दुरुस्त करने की कार्रवाई को भी सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर तय होगी जवाबदेही –

द्वितीय अग्निशमन सुरक्षा अधिकारी करन यादव ने बताया कि “दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों में किसी भी स्तर पर लापरवाही भारी पड़ सकती है। उन्होंने आयोजन समितियों से अपील की कि वे पंडालों में निर्धारित अग्निसुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करें और विभाग से एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करें।
उन्होंने कहा कि पंडालों में आग बुझाने के पर्याप्त उपकरण, पानी और बालू की व्यवस्था रखने के साथ ही आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते बनाए जाने चाहिए। बिजली की वायरिंग में किसी तरह की लापरवाही न हो और पंडालों के आसपास अग्निशमन वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित आयोजन समिति की जवाबदेही तय की जाएगी।”

दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा के लिए बरतें सावधानी, इन नियमों का करें पालन –

दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन विभाग ने आयोजन समितियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने पंडालों के निर्माण से लेकर बिजली की व्यवस्था और आपातकालीन निकासी तक निर्धारित मानकों का पालन करने की हिदायत दी है। साथ ही आग से बचाव के लिए पर्याप्त पानी, बालू और अग्निशमन यंत्रों की व्यवस्था रखने को कहा है।

विभागीय निर्देशों के मुताबिक, पंडाल के चारों तरफ कम से कम 4.5 मीटर खुला स्थान छोड़ना जरूरी है। पंडाल की ऊंचाई तीन मीटर से अधिक रखी जाए तथा बाहर निकलने के रास्ते की चौड़ाई कम से कम पांच मीटर हो। आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कम से कम दो निकास द्वार बनाए जाएं। बिजली की व्यवस्था लाइसेंसधारी ठेकेदार से कराई जाए और तारों के जोड़ सुरक्षित रखने के साथ इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। आग बुझाने के लिए निर्धारित संख्या में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध रखने के साथ प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र के हिसाब से 0.75 लीटर पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। पानी और बालू पंडाल के अंदर तथा बाहर दोनों जगह रखे जाएं। पंडाल में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों को अग्निरोधक घोल से उपचारित कराया जाए। वहीं, कुर्सियों की व्यवस्था इस तरह की जाए कि श्रद्धालुओं के आवागमन और आपातकालीन निकासी में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल से बचें –

अग्निशमन विभाग ने पंडाल निर्माण में सिंथेटिक और अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी है। पंडाल को दीवार या बाउंड्रीवाल से सटाकर बनाने से बचने तथा निकास मार्गों को किसी भी स्थिति में बाधित नहीं करने को कहा गया है। इसके अलावा पंडाल के पास रसोईघर स्थापित नहीं करने और बिजली की लाइनों के नीचे पंडाल नहीं बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली के तारों और उनके जोड़ों को खुला छोड़ना भी आग का कारण बन सकता है। ऐसे में वायरिंग को सुरक्षित रखने, पंडाल के पास हैलोजन लाइट नहीं लगाने तथा बिजली के तारों को पंडाल से सटाकर नहीं रखने की सलाह दी गई है। पंडाल के अंदर और आसपास आतिशबाजी तथा धूम्रपान पर रोक रखने के साथ अग्निशमन के लिए सुरक्षित रखे गए पानी का इस्तेमाल दूसरे कार्यों में नहीं करने को भी कहा गया है।

आग लगने पर तत्काल दें सूचना –

अग्निशमन विभाग ने आयोजन समितियों और आम लोगों से अपील की है कि पंडालों में अग्निसुरक्षा के इंतजामों को गंभीरता से लें। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके। इसके लिए अग्निशमन सेवा के मो0नं0 9454418633 अथवा आपातकालीन हेल्पलाइन 112 पर संपर्क किया जा सकता है।

Anand Kumar Chaubey
Author: Anand Kumar Chaubey

9 years experience in Journalism....

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