उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का संचालन करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने शिकंजा कसते हुए मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसके मौसेरे भाई गौरव जायसवाल सहित चार आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और गौरव जायसवाल वर्तमान में दुबई में छिपे हुए हैं, जिन्हें भारत वापस लाने के लिए एसटीएफ द्वारा गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के माध्यम से प्रत्यर्पण व पत्राचार की प्रक्रिया तेजी से चलाई जा रही है। वाराणसी के मूल निवासी शुभम जायसवाल पर इस पूरे अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय नेटवर्क को संचालित करने का मुख्य आरोप है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने पिछले वर्ष इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसकी जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि यह गिरोह देश की नामी दवा निर्माता कंपनी ‘एबॉट’ से कोडीन कफ सिरप की भारी खेप खरीदकर देश के विभिन्न राज्यों में खपाने के साथ-साथ नेपाल और बांग्लादेश तक अवैध रूप से इसकी आपूर्ति करता था।
एसटीएफ की लंबी और तकनीकी जांच-पड़ताल में इस बात के ठोस सबूत हाथ लगे हैं कि इस अवैध कारोबार के जरिए पिछले कुछ वर्षों में कई सौ करोड़ रुपये की काली कमाई की गई थी, जिसका बड़ा हिस्सा हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया। इस मामले में दाखिल की गई चार्जशीट में मास्टरमाइंड शुभम और गौरव के अलावा अमित जायसवाल तथा विकास सिंह नर्वे को भी नामजद आरोपी बनाया गया है। जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे सिंडिकेट में फंड मैनेजमेंट और वित्तीय लेन-देन की पूरी जिम्मेदारी मास्टरमाइंड के मौसेरे भाई गौरव जायसवाल के हाथों में थी, जिस पर शुभम सबसे अधिक भरोसा करता था। अवैध कारोबार से आने वाला पैसा कहां निवेश किया जाना है, किसे कितना कमीशन देना है और रकम को कैसे ठिकाने लगाना है, इन सबका अंतिम निर्णय गौरव ही लिया करता था। वहीं, विकास सिंह पूर्वांचल क्षेत्र में इस सिंडिकेट के स्थानीय कामकाज को संभालता था और वह शुभम के सबसे करीबी गुर्गों में शामिल था। विकास की लगभग एक दर्जन फर्जी फर्मों के माध्यम से कोडीन सिरप की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त किए जाने की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे आरोपी अमित जायसवाल की शैली ट्रेडर्स और श्री हरि फार्मा फर्मों के जरिए करीब दस करोड़ रुपये मूल्य के कफ सिरप की खरीद के पुख्ता सबूत मिले हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसटीएफ अब तक कुल 32 लोगों को आरोपी बना चुकी है, जिनमें से 19 आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि अब तक कुल 14 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस सिंडिकेट के अन्य प्रमुख चेहरों में अमित टाटा और विभागीय मिलीभगत के आरोप में बर्खास्त सिपाही आलोक सहित आधा दर्जन से अधिक शातिर अपराधी इस समय जेल में बंद हैं। एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां दुबई में बैठे मास्टरमाइंड की वतन वापसी के साथ-साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं, ताकि इस अवैध कारोबार की जड़ों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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