तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में साइबर अपराध के एक मामले को लेकर महिला पत्रकार जल्ली रेखा से करीब सात घंटे तक की गई पूछताछ के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं, परिजनों और पत्रकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान महिला पत्रकार को उनके 6 महीने के दूधमुंहे शिशु और 3 साल के मासूम बेटे के साथ सेंट्रल क्राइम स्टेशन (सीसीएस) में लंबे समय तक रोके रखा गया, जो मानवाधिकारों और बच्चों की सुरक्षा का खुला उल्लंघन है। परिजनों का यह भी दावा है कि मंगलवार देर रात लगभग आधी रात को सीसीएस की पुलिस टीम बिना किसी महिला पुलिसकर्मी के उनके घर नोटिस देने पहुंची थी, जिसके बाद बुधवार को उन्हें पूछताछ के लिए सीसीएस थाने बुलाया गया।
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की बेटी की कथित संपत्तियों और दवा कंपनियों के स्वामित्व को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए दावों से जुड़ी एक प्राथमिकी (एफआईआर) से संबंधित है, जो बीआरएस नेता कृष्णांक मन्ने के खिलाफ दर्ज की गई है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) और 352 के तहत केस दर्ज किया है। घटनाक्रम के बाद बीआरएस और विभिन्न पत्रकार संगठनों ने पुलिस कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला और महिला पत्रकार को डराने-धमकाने का प्रयास करार दिया है। विपक्षी नेताओं और मीडिया संघों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से इस रवैये पर स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच के दौरान महिलाओं व बच्चों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की है।
Author: NAV HIND SAMACHAR
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