आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण के निर्माण के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील नेतृत्व विकसित करने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्यों के लिए दक्षता, मानसिक स्वास्थ्य एवं बेलबीइंग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डायट के मालवीय सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालय नेतृत्व को प्रभावी बनाने के साथ प्रधानाचार्यों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की व्यवहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन डायट प्राचार्य रिद्धि पाण्डेय के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण में ‘प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्यों के दायित्व’ विषयक हस्तपुस्तिका को आधार बनाकर विद्यालय नेतृत्व, प्रशासनिक जिम्मेदारियों, शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों तथा विद्यालय में सकारात्मक वातावरण विकसित करने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और बेलबीइंग जैसे विषयों को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया। गतिविधि आधारित सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को विद्यार्थियों की भावनात्मक एवं मानसिक आवश्यकताओं को समझने तथा विद्यालय में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक वातावरण विकसित करने के प्रभावी उपायों से परिचित कराया गया।
प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्यों ने प्रशिक्षण में सक्रिय –
सहभागिता करते हुए विद्यालयों में सामने आने वाली विभिन्न परिस्थितियों और अपने अनुभवों को साझा किया। इस दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यालय केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का केंद्र न होकर विद्यार्थियों के भावनात्मक और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण मंच है। इसके लिए विद्यालय नेतृत्व को संवेदनशील और विद्यार्थी-केंद्रित बनाए जाने की आवश्यकता है।
वहीं डायट प्राचार्य रिद्धि पाण्डेय ने कहा कि “प्रधानाध्यापक विद्यालय की शैक्षिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमुख नेतृत्वकर्ता होते हैं। उनके नेतृत्व का सीधा प्रभाव विद्यालय के वातावरण, शिक्षकों की कार्यशैली और विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया पर पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण को विद्यालयी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, तनाव प्रबंधन और बेहतर संवाद की संस्कृति विद्यालय को अधिक स्वस्थ एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं व्यवहारिक कौशल को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने का आह्वान किया गया, ताकि विद्यालयों में बेहतर नेतृत्व के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार किया जा सके।”






