आनन्द कुमार चौबे, सोनभद्र। डाला में पागल कुत्ते का आतंक अब लोगों के लिए दहशत का पर्याय बनता जा रहा है, लेकिन नगर पंचायत की कथित सुस्ती के कारण खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। दो दिन पहले चार बच्चों समेत 16 लोगों को काटकर घायल करने वाला पागल कुत्ता रविवार को फिर खूंखार हो गया। सुबह से ही डाला के विभिन्न क्षेत्रों में दो बच्चों सहित कुल चार लोगों को अपना शिकार बना लिया। एक के बाद एक घायल जब उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन पहुंचे तो अस्पताल में कुत्ता काटने से घायलों की भीड़ नजर आ रही है।
एक ही कुत्ते के लगातार हमलों के बावजूद उसके खुलेआम घूमने की बात सामने आना नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दो दिन पहले 16 लोग घायल हुए, फिर भी कथित तौर पर कुत्ते को पकड़ने की ठोस कार्यवाही नहीं हुई और अब दोबारा आधा दर्जन लोग शिकार बन गए। आखिर नगर पंचायत क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है?
नगर पंचायत के पास नहीं है कुत्ता पकड़ने की व्यवस्था –
डाला क्षेत्र में आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या कोई नई बात नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते हैं और राहगीरों तथा बच्चों के पीछे दौड़ना आम हो गया है लेकिन पागल कुत्ते द्वारा लगातार लोगों को काटे जाने के बाद भी यदि उसे रेस्क्यू करने के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया, तो यह व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नगर पंचायत के पास आखिर ऐसी स्थिति से निपटने की व्यवस्था है भी या नहीं? यदि रेस्क्यू टीम है तो अब तक कुत्ता पकड़ा क्यों नहीं गया? यदि टीम नहीं है तो इतने बड़े नगर क्षेत्र में आवारा और आक्रामक कुत्तों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
कहीं बड़ी घटना के इंतजार में तो नहीं है जिम्मेदार –
रविवार को CHC चोपन में घायलों की भीड़ ने स्थिति की गंभीरता सामने ला दी। कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे लोगों की संख्या ने इलाके में फैली दहशत को भी उजागर कर दिया है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस आतंक की चपेट में बच्चे भी आ चुके हैं। दो दिन पहले चार बच्चों समेत 16 लोगों के घायल होने के बाद भी यदि खतरा टला नहीं और फिर नए लोग शिकार बन गए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नगर पंचायत किसी बड़े हादसे के बाद ही सक्रिय होगी?
जिम्मेदारी सिर्फ कूड़ा उठाने और टैक्स वसूलने तक सीमित –
वहीं स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत से सवाल करते हुए कहा कि जब नागरिकों की सुरक्षा खतरे में हो तो स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? सफाई, नाली और टैक्स वसूली के साथ-साथ नगर क्षेत्र को सुरक्षित रखना भी स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में लगातार हो रहे कुत्तों के हमलों के बीच केवल घायलों का अस्पताल पहुंचना समाधान नहीं है। जरूरत उस खतरे को खत्म करने की है, जिससे लोग घायल हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग किया कि नगर पंचायत तत्काल विशेष रेस्क्यू अभियान चलाए, पागल कुत्ते को सुरक्षित तरीके से पकड़वाए और पूरे डाला क्षेत्र में आक्रामक एवं आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करे।
बहरहाल डाला में पागल कुत्ते का आतंक अब नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल बन चुका है। दो दिन में 22 से अधिक लोगों के शिकार बनने और इनमें मासूम बच्चों के शामिल होने के बावजूद यदि जिम्मेदारों की सक्रियता जमीन पर नजर नहीं आती, तो इसे महज लापरवाही कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लोगों को हर दिन इस डर के साथ घर से निकलना पड़ रहा है कि अगला हमला कहीं उनके बच्चे या परिवार के किसी सदस्य पर न हो जाए। घटना के बाद घायलों का इलाज कराना समाधान नहीं, खतरे को खत्म करना जिम्मेदारी है। अब बड़ा सवाल यही है कि नगर पंचायत किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है या फिर समय रहते रेस्क्यू अभियान चलाकर डाला के लोगों को इस आतंक से निजात दिलाएगी?





