फेसबुक पर फर्जी लिंक के जरिए ओबरा के व्यवसायी से ₹1.70 लाख की साइबर ठगी, सोनभद्र पुलिस ने तत्परता दिखाकर वापस कराए ₹1.69 लाख

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ओबरा (सोनभद्र)। सोशल मीडिया पर बैंक के नाम से प्रसारित होने वाले फर्जी विज्ञापनों और लिंक्स के जरिए मासूम लोगों को ठगने वाले साइबर अपराधियों की बड़ी साजिश पर सोनभद्र पुलिस ने करारा प्रहार किया है। फेसबुक पर पंजाब नेशनल बैंक के नाम से आए एक फर्जी लिंक के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने वाले एक पीड़ित को साइबर टीम की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से बड़ी राहत मिली है। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंकों से त्वरित समन्वय स्थापित कर ठगी गई कुल राशि में से ₹1,69,482.48 को सफलतापूर्वक फ्रीज कराते हुए पीड़ित के बैंक खाते में वापस मंगा लिया है।

धोखाधड़ी के इस पूरे मामले का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि ओबरा मार्केट निवासी पीड़ित दिलीप कुमार जायसवाल (पुत्र स्वर्गीय वृज मोहन लाल जायसवाल) का खाता पंजाब नेशनल बैंक में है। कुछ दिनों पहले उनके फेसबुक अकाउंट पर पंजाब नेशनल बैंक के नाम से बैलेंस चेक करने संबंधी एक आकर्षक लेकिन फर्जी विज्ञापन और लिंक दिखाई दिया। दिलीप कुमार जायसवाल ने इसे बैंक की आधिकारिक और प्रामाणिक सेवा समझकर लिंक को खोल लिया और उसमें अपनी बैंकिंग व व्यक्तिगत जानकारियां दर्ज कर दीं। साइबर अपराधियों ने इस गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करते हुए इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से उनके खाते से कुल ₹1,70,000/- की अवैध निकासी कर ली। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने बिना समय गंवाए तत्काल नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) व नोडल साइबर क्राइम ऋषभ रुणवाल के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी पिपरी हर्ष पाण्डेय के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक थाना ओबरा सदानन्द राय के नेतृत्व में पुलिस व साइबर सेल की टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला। साइबर हेल्प डेस्क के आरक्षी पंकज कुमार और टीम ने आधुनिक तकनीकी विश्लेषण के जरिए उस डिजिटल रूट का पता लगाया जहां पैसे ट्रांसफर किए गए थे। टीम ने बिना वक्त जाया किए संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थाओं से त्वरित ई-मेल पत्राचार कर समन्वय स्थापित किया, जिसके चलते फ्रॉड की गई धनराशि में से लगभग पूरी रकम यानी ₹1,69,482.48 को बीच में ही होल्ड करा दिया गया और विधिक प्रक्रिया पूरी कर उसे पीड़ित के मूल खाते में सुरक्षित वापस भेज दिया गया। समय पर शिकायत दर्ज होने और पुलिस की सक्रियता के कारण ही पीड़ित की इतनी बड़ी रकम डूबने से बच सकी।

इस बड़ी कामयाबी के बाद सोनभद्र पुलिस ने आम जनता को सचेत करते हुए एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैंक, केवाईसी अपडेट, बैलेंस चेक, रिवॉर्ड पॉइंट, लोन या फिर कम समय में भारी मुनाफे वाले निवेश संबंधी किसी भी अनजान लिंक पर बिना जांच-पड़ताल किए कभी भी क्लिक न करें। जनता को यह समझना होगा कि कोई भी प्रामाणिक बैंक कभी भी फोन, एसएमएस, ई-मेल या सोशल मीडिया के माध्यम से ओटीपी, यूपीआई पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड का सीवीवी नंबर जैसी गोपनीय बैंकिंग जानकारियां नहीं मांगता। पुलिस ने जोर देकर कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना डरे और बिना देरी किए तत्काल ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन नंबर या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराए, क्योंकि घटना के शुरुआती कुछ घंटों में शिकायत दर्ज होने से पैसे सुरक्षित रहने और वापस मिलने की उम्मीद सबसे ज्यादा होती है।

Harsh Vardhan
Author: Harsh Vardhan

7 years experience in the field of journalism.

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