सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, काशी मंडल में घटे हजारों नामांकन और बिगड़ा छात्र-शिक्षक अनुपात

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उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विद्यालय इन दिनों शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूलों में होने वाले नामांकनों पर पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कहीं 30 तो कहीं 60 छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी महज एक ही शिक्षक के कंधों पर है, जबकि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत आदर्श छात्र-शिक्षक अनुपात 25:1 होना चाहिए। वाराणसी मंडल के किसी भी जिले में इस मानक का पालन नहीं हो पा रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए माध्यमिक विद्यालयों में इस सत्र में भी ‘उधार के गुरुजी’ यानी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षकों को बुलाकर क्लास लेनी पड़ेगी। इस अव्यवस्था का परिणाम यह हुआ है कि अकेले काशी (वाराणसी) में एक ही साल के भीतर 14,541 नामांकन घट गए हैं। पिछले सत्र में जहाँ 46,197 छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया था, वहीं इस बार यह आंकड़ा सिमटकर महज 31,656 रह गया है। हालांकि पूर्वांचल के अन्य जिलों की तुलना में काशी की स्थिति फिर भी थोड़ी बेहतर बताई जा रही है।

शिक्षकों की यह किल्लत मुख्य विषयों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है। काशी के सात प्रमुख राजकीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण प्रबंधन को अतिरिक्त बाहरी शिक्षकों की व्यवस्था करनी पड़ रही है और छात्रों का कोर्स जैसे-तैसे खींचतान कर पूरा कराया जा रहा है। पूरे वाराणसी मंडल में सबसे बदतर स्थिति जौनपुर और गाजीपुर जिलों की है। जौनपुर के आठ स्कूलों में गणित, सात में विज्ञान और छह विद्यालयों में कंप्यूटर के शिक्षक गायब हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जौनपुर में छात्र-शिक्षक अनुपात 36:1 और गाजीपुर में 35:1 तक पहुँच चुका है, जबकि चंदौली में यह 32:1 और वाराणसी में 29:1 दर्ज किया गया है। जौनपुर के परिषदीय विद्यालयों में करीब ढाई लाख छात्र पढ़ते हैं, लेकिन शिक्षकों की भारी किल्लत के कारण बच्चे बुनियादी शिक्षा में निपुण नहीं हो पा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस बार चंदौली और भदोही जिलों में नामांकन का ग्राफ गिरकर 45 फीसदी से भी कम रह गया है। गाजीपुर में भी बीते वर्ष के 50,996 नामांकनों के मुकाबले इस बार केवल 35,510 दाखिले हुए हैं, जबकि चंदौली में यह संख्या घटकर केवल 22,918 रह गई है।

वाराणसी के प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज सहित भैठौली, भिखारीपुर, खरगूपुर, भतसार, बेसहूपुर, बेलारी, हसनपुर, महगांव, चितईपुर और लालपुर के राजकीय हाईस्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। विभाग को उम्मीद थी कि पिछले शैक्षणिक सत्र या बोर्ड परीक्षाओं के बीतने तक नई भर्तियों से यह कमी दूर हो जाएगी, क्योंकि इसके लिए परीक्षा भी आयोजित की जा चुकी है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटके होने के कारण इस नए सत्र में भी राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस गिरते ग्राफ पर संज्ञान लेते हुए एडी बेसिक हेमंत राव का कहना है कि सत्र की शुरुआत में नामांकन की प्रगति ठीक न होने पर बीते दिनों समीक्षा कर 90 विद्यालयों के 250 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोका गया था। अब स्कूल खुलने पर शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क कर नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, डीआईओएस भोलेंद्र प्रताप सिंह ने उम्मीद जताई है कि राजकीय विद्यालयों में बीच-बीच में हो रही तैनातियों से काफी हद तक कमी दूर हुई है और सत्र के बीच में ही कुछ नए शिक्षक मिल जाएंगे, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 2 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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