सोनभद्र। जनपद में महिला व बाल अपराधों के साथ-साथ मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने एक संगठित और मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसके दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जो नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर दूसरे राज्यों में मोटी रकम के बदले बेच दिया करते थे। इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा सदर कोतवाली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्षेत्राधिकारी नगर (सीओ सिटी) रणधीर मिश्रा ने किया।
उन्होंने बताया कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर राजस्थान के जयपुर तक फैला हुआ था, जहां मासूम बच्चियों को चंद रुपयों के लालच में दलदल में धकेल दिया जाता था। इस पूरे ऑपरेशन को पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के कड़े निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अनिल कुमार के कुशल मार्गदर्शन और प्रभारी निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया, जिसमें थाना रॉबर्ट्सगंज के उपनिरीक्षक योगेंद्र पांडेय की टीम ने मुख्य भूमिका निभाई।

पुलिस टीम को यह सफलता उस समय मिली जब उपनिरीक्षक योगेंद्र पांडेय अपनी टीम के साथ गश्त पर थे और इसी दौरान मुखबिर से एक सटीक सूचना प्राप्त हुई। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई करते हुए रॉबर्ट्सगंज फ्लाई ओवर के नीचे घेराबंदी की और वहां छिपे बैठे दो शातिर वांछित अभियुक्तों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में 24 वर्षीय विपिन पुत्र रमाशंकर उर्फ गन्नू, जो मिर्जापुर जिले के चुनार थाना क्षेत्र के दुमदुमा का रहने वाला है, और दूसरी आरोपी काजल उर्फ मंजू पत्नी पवन चौधरी है, जो मूल रूप से सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र के खरौंधी की निवासी है और वर्तमान में रॉबर्ट्सगंज के अंबेडकरनगर में किराए के मकान में रह रही थी। इन दोनों के खिलाफ थाना रॉबर्ट्सगंज में मु0अ0सं0 109/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 143(4), 98, 61(2), 64(2)(m) और पॉक्सो एक्ट की धारा 16/17 के तहत मुकदमा पंजीकृत है।
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने दोनों अभियुक्तों से कड़ाई से पूछताछ की और मामले की विवेचना आगे बढ़ाई, तो रोंगटे खड़े कर देने वाले तथ्य सामने आए। साक्ष्यों से यह साफ हुआ कि इस गिरोह ने एक नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर अगवा किया था और उसे अपने साथ ले जाकर विभिन्न राज्यों में सक्रिय मानव तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों के माध्यम से मोटी रकम लेकर कई लोगों को सौंप दिया था। इस पूरी खरीद-फरोख्त के दौरान मासूम बालिका का शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। पुलिस को जांच में गिरोह के सदस्यों के बीच लाखों रुपये के अवैध लेन-देन और बैंक खातों में हेरफेर के पुख्ता सबूत भी हाथ लगे हैं। पीड़िता द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए गए बयानों और पुलिस द्वारा जुटाए गए अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोनों अभियुक्तों की संलिप्तता पूरी तरह सिद्ध पाई गई है, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और विधिक प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन करते हुए पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा है। इस बड़ी कामयाबी को हासिल करने वाली टीम में उपनिरीक्षक योगेंद्र पांडेय के साथ मुख्य आरक्षी संजीव राय, मुख्य आरक्षी संदीप राय, आरक्षी मनीष यादव और महिला आरक्षी आकृति मिश्रा शामिल रहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार बहुत गहरे जुड़े हैं और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए विस्तृत जांच और दबिश की कार्रवाई लगातार जारी है।
Author: Harsh Vardhan
7 years experience in the field of journalism.





