बिजली संकट पर सीएम योगी सख्त: गांव हो या शहर, भीषण गर्मी में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली देना हर हाल में सुनिश्चित करें

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती को लेकर मचे हाहाकार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया है। रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन तथा सभी डिस्कॉम के आला अधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने दोटूक निर्देश दिए कि प्रदेश के चाहे ग्रामीण इलाके हों या शहरी क्षेत्र, इस तपती गर्मी में जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को किसी भी प्रकार के बिजली संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी का यह दौर अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, इसलिए ऊर्जा विभाग पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे। बैठक में विद्युत उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और संयंत्रों की तकनीकी दक्षता व रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है, जिसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता तथा जल विद्युत परियोजनाओं की 526.4 मेगावाट क्षमता शामिल है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा जैसी संयुक्त परियोजनाओं से 3,742 मेगावाट बिजली मिल रही है। वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से भी लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक मजबूत, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए गर्मी में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के पास वर्तमान में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं और प्रदेश में 715 उपकेंद्रों के माध्यम से 2,05,632 एमवीए क्षमता उपलब्ध है, जहां ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है तथा पारेषण हानियां घटकर मात्र 3.2 प्रतिशत रह गई हैं। वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह और उपभोक्ता केंद्रित बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए और कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने अथवा शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही कतई स्वीकार नहीं की जाएगी। आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम को सक्रिय रखने की हिदायत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरम्मत और बहाली का कार्य युद्धस्तर पर होना चाहिए। बैठक में बताया गया कि मई माह में आए आंधी-तूफान से 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, जिन्हें तेजी से बहाल किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले स्थलों पर बिना सक्षम प्राधिकारी की विधिवत पूर्व स्वीकृति के खुदाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए ताकि विद्युत व्यवस्था बाधित न हो। उन्होंने ट्रांसफॉर्मर क्षति की घटनाओं में आई भारी कमी की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या 80 प्रतिशत घटकर केवल 87 रह गई। इसी तरह 100 केवीए से अधिक क्षमता वाले बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर भी 39,177 से घटकर 20,292 रह गई है।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में भारी वृद्धि के कारण बिजली की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत दैनिक मांग 501 मिलियन यूनिट से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि पीक डिमांड 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच गई। इसके चलते 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश पूरे देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री ने इस बढ़ती मांग के अनुरूप विभिन्न पावर प्लांटों में आई तकनीकी दिक्कतों के बावजूद 12 राज्यों के साथ की गई पावर बैंकिंग व्यवस्था की सराहना की और आपूर्ति प्रबंधन को दुरुस्त रखने को कहा। भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर बल देते हुए बताया गया कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच प्रदेश ने कुल 32,305 मेगावाट की विद्युत क्षमता के लिए टाई-अप किए हैं, जिसमें पिछले तीन वर्षों में ही 62 प्रतिशत क्षमता जोड़ी गई है और वर्ष 2029 तक की मांग को पूरा करने के लिए विंड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो जैसी परियोजनाओं के माध्यम से 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने पर काम चल रहा है।

उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित व पारदर्शी बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 से लागू की गई नई एकीकृत 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था की समीक्षा की, जिसकी कॉल हैंडलिंग क्षमता अब बढ़कर 75 हजार से 90 हजार प्रतिदिन हो गई है। सीएम ने ऊर्जा मंत्रियों को स्वयं हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली बाधित होने पर उपभोक्ताओं को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें स्पष्ट रूप

से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा। इसके अतिरिक्त, स्मार्ट मीटर व्यवस्था को उपभोक्ता हितैषी बनाने के तहत मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी 89.23 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित रखा जाए। जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के बिल प्रत्येक माह की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड आधार पर एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से जारी किए जाएंगे। साथ ही 15 मई से 30 जून तक प्रदेशभर में विशेष कैंप आयोजित कर स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि बिजली आपूर्ति केवल एक तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि यह आमजन के जीवन, किसानों की सिंचाई, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास की रीढ़ है, इसलिए फील्ड अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और लापरवाही मिलने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

AJEET KUMAR SINGH
Author: AJEET KUMAR SINGH

अजीत कुमार सिंह, नव हिंद समाचार (न्यूज़ एजेंसी) के उत्तर प्रदेश स्टेट हेड के रूप में कार्यरत्त हैं, जिनके पास पत्रकारिता का 3 साल का अनुभव है। अपनी तीव्र रिपोर्टिंग, रणनीतिक सोच और फील्ड वर्क में महारत के साथ, वह उत्तर प्रदेश में एजेंसी को प्रभावी ढंग से संभाल रहे हैं। अजीत जमीनी स्तर के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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