दुष्कर्म के दोषी दुद्धी के पूर्व BJP विधायक राम दुलारे गोंड की जमानत मंजूर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से किया इन्कार

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 25 साल की कठोर सजा काट रहे सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक राम दुलारे गोंड को एक बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि और सजा के निलंबन (रोक लगाने) की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसका साफ मतलब है कि वह जेल से बाहर तो आ सकेंगे लेकिन बतौर दोषी उनका ठप्पा बरकरार रहेगा। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की एकल पीठ ने पूर्व विधायक राम दुलारे गोंड द्वारा दाखिल की गई आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो राम दुलारे गोंड पर नाबालिग से दुष्कर्म का यह गंभीर आरोप साल 2014 में लगा था। उस समय वह राजनीति में सक्रिय थे और उनकी पत्नी सुरतन रासपहरी गांव की ग्राम प्रधान थीं, जिसके चलते वह क्षेत्र में प्रधानपति के रूप में रसूख रखते थे। इसके बाद साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दुद्धी (सुरक्षित) सीट से अपना उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और कई बार के विधायक रहे विजय सिंह गोंड को छह हजार से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी और पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि, विधायक बनने के बाद भी उनके खिलाफ चल रहा यह पुराना आपराधिक मुकदमा जारी रहा।

इस मामले में सोनभद्र की विशेष पॉक्सो और सत्र अदालत ने करीब नौ साल चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 15 दिसंबर 2023 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। विशेष अदालत ने राम दुलारे गोंड को नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस सजा के ऐलान के तत्काल बाद ही विधानसभा सचिवालय द्वारा उनकी विधायकी रद्द कर दी गई थी और उन्हें जेल भेज दिया गया था। निचली अदालत के इसी फैसले और सजा के खिलाफ पूर्व विधायक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व विधायक के वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को राजनीतिक द्वेष के चलते इस मामले में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने पीड़िता की वास्तविक उम्र, घटना के बाद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने में हुई लंबी देरी और मामले से जुड़े गर्भावस्था संबंधी चिकित्सकीय तथ्यों पर गंभीर सवाल उठाए और जमानत की गुहार लगाई। दूसरी ओर, राज्य सरकार के शासकीय अधिवक्ता और शिकायतकर्ता पक्ष के वकीलों ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही और न्यायसंगत ठहराते हुए पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों और पुख्ता मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया। दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल पूर्व विधायक की जमानत तो मंजूर कर ली है, लेकिन उनकी सजा पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए अगस्त महीने की तारीख मुकर्रर की है।

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Author: Navhind Samachar

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