Sonbhadra News : स्वास्थ्य विभाग की जांच में 18 अस्पताल फेल, पंजीयन निरस्त, कार्यवाही के लिए टीम गठित

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र। जिले में निजी अस्पतालों के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच में एक बार फिर बड़ी तस्वीर सामने आई है। जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे 18 निजी अस्पतालों का पंजीयन सीएमओ ने निरस्त कर दिया है। अब इन अस्पतालों को बंद कराने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि कार्यवाही के लिए जिलाधिकारी की ओर से एसडीएम, संबंधित नोडल अधिकारी और सीओ की तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम इन अस्पतालों के खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, जिले के कुछ अन्य निजी अस्पताल भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में बताए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन अस्पतालों की जांच के दौरान कई जगह निर्धारित मानकों के अनुरूप चिकित्सकीय व्यवस्था नहीं मिली। चर्चा है कि निरीक्षण के समय कुछ अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ तक मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर गैर-विधा के लोगों द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक स्थिति संबंधित जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।

सूत्रों की मानें तो जांच के दायरे में आए कई अस्पतालों के पंजीयन का नवीनीकरण भी नहीं कराया गया था। इसके बावजूद इनके संचालन को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। यहीं वजह है कि 18 अस्पतालों का पंजीयन निरस्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है।

पंजीयन के समय मानक पूरे, जांच में व्यवस्थाएं गायब –

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के मुताबिक निजी अस्पताल के पंजीयन और नवीनीकरण के लिए चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल है। अस्पताल में 24 घंटे एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता के साथ जरूरत पड़ने पर ऑन-कॉल सर्जन और एनेस्थेटिस्ट की व्यवस्था भी अपेक्षित होती है।

कार्यवाही के बावजूद जिले में जारी है कथित अवैध अस्पतालों का खेल –

जिले में कथित अवैध क्लीनिक और मानक विहीन अस्पतालों के संचालन की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। गुरुवार की शाम ही चोपन में भी एक कथित अवैध अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस की मौजूदगी में कार्यवाही करते हुए उसे सील किया था। वहां तीन मरीज भर्ती मिले थे, जिन्हें एंबुलेंस से सीएचसी चोपन भेजा गया।

एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चाओं के मुताबिक जिले में अभी भी कुछ ऐसे निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं, जहां निर्धारित मानकों के अनुरूप चिकित्सक और स्टाफ की उपलब्धता को लेकर सवाल बने हुए हैं। यदि ऐसा है तो इन संस्थानों की नियमित जांच और कार्यवाही की जरूरत और बढ़ जाती है।

18 पर गिरी गाज, अब बाकी पर नजर –

18 निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त किए जाने के बाद अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इन अस्पतालों को वास्तव में बंद कराने के लिए क्या कार्यवाही करता है साथ ही स्वास्थ्य विभाग की रडार पर बताए जा रहे अन्य अस्पतालों की जांच का परिणाम भी महत्वपूर्ण होगा।

“बहरहाल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मानकों से समझौता किसी भी स्तर पर मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में सिर्फ पंजीयन निरस्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कार्यवाही के बाद संबंधित अस्पताल चोरी-छिपे या किसी दूसरे नाम से दोबारा संचालन शुरू न कर दें साथ ही यह भी जांच का विषय है कि जिन अस्पतालों को अब मानक विहीन पाया गया, उनके पंजीयन और नवीनीकरण के दौरान विभागीय स्तर पर मानकों की वास्तविक जांच किस तरह हुई थी। अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग 18 अस्पतालों की कार्यवाही के बाद जिले में संचालित अन्य कथित अवैध और मानक विहीन अस्पतालों पर किस तरह ही कार्यवाही होती है।”

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