आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अब कर्मचारी आंदोलनों का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग संवर्गों में शुरू हुआ विरोध अब एक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। 153 संविदा एएनएम और सीएचओ पहले से हड़ताल पर हैं, 1900 से अधिक ग्रामीण और शहरी आशाओं ने बुधवार से कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है, जबकि पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे 500 से अधिक संविदा एवं आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मी भी गुरुवार से कार्य बहिष्कार पर उतरने जा रहे हैं। यानी जिले की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े हजारों कर्मियों के आंदोलन में शामिल होने की स्थिति बन गई है। ऐसे में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, फील्ड विजिट और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित गतिविधियों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं तक पर असर पड़ने की आशंका ने विभाग की चुनौती बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर संविदा एवं आउटसोर्सिंग स्वास्थ्यकर्मी पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज करा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा सहित उनकी विभिन्न मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। मांगों के समाधान के लिए अब चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
एक के बाद एक मोर्चा खुला, विभाग पर बढ़ा दबाव –
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर 153 संविदा एएनएम और सीएचओ की हड़ताल जारी है, वहीं 1900 से अधिक आशाओं के कार्य बहिष्कार से गांवों और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की फील्ड गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका है। अब 500 से अधिक अन्य संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों के कार्य बहिष्कार में शामिल होने से विभाग के सामने स्थिति को सामान्य बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी विभिन्न मांगें और लंबित समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इसी को लेकर उन्होंने अब कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। कर्मचारियों के लगातार आंदोलन के कारण स्वास्थ्य विभाग के सामने एक साथ कई मोर्चों पर स्थिति संभालने की चुनौती है।
टीकाकरण और मातृ-शिशु सेवाओं पर पड़ सकता है असर –
स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था में एएनएम, सीएचओ और आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की देखभाल, स्वास्थ्य जागरूकता, फील्ड विजिट और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाने में इन कर्मचारियों की अहम भागीदारी रहती है।
ऐसे में यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले जाते हैं तो नियमित स्वास्थ्य गतिविधियों की गति प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से आवश्यक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न करने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर मानव संसाधन की कमी विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
सरकार के रुख पर टिकी कर्मचारियों की नजर –
NHM संघ के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र शुक्लाअ ने बताया कि “वे वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तों, वेतन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।”






